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सुप्रीम कोर्ट ने बढ़ाया बैंक लोन मोरेटोरियम मामला यहाँ जाने कितना टला। ..

Sarvoday Times 6 years ago 1 minute read 0 comments
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सुप्रीम कोर्ट में आज लोन मोरेटोरियम मामले की सुनवाई 5 अक्टूबर तक के लिए टाल दी गई है. केंद्र सरकार ने सुनवाई के दौरान कोर्ट से समय मांगा है. केंद्र सरकार ने कहा की वह इस मामले में RBI से बातचीत कर रही है और बहुत जल्द कोई समाधान निकलेगा.

इसलिए किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए थोड़ा समय दिया जाए. इसके बाद अब लोन मोरेटोरियम मामले में अगली सुनवाई 5 अक्टूबर को होगी. जस्टिस अशोक भूषण की बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही है. कोर्ट ने केंद्र सरकार से एफिडेविट रखने के लिए केंद्र को 1 अक्टूबर तक का समय दिया है.

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट से समय मांगते हुए कहा यह थोड़ा जटिल मसला है. कई आर्थिक मामले सामने आ रहे हैं. हम आरबीआई से इस मामले पर बातचीत कर रहे हैं.

इससे पहले 10 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि मामले को बार-बार टाला जा रहा है. सुप्रीम कोर्ट ने दो सप्ताह का मौका देते हुए कहा था कि सब अपना जवाब दाखिल करें और मामले में ठोस योजना के साथ अदालत आएं. दरअसल ये पहले से चल रही सुनवाई के क्रम में ही है.

RBI की घोषणा से आपके Loan और Installment पर किस तरह से पड़ेगा असर, जानें -  YouTube

इस मोरेटोरियम में व्यवस्था है कि जो लोग अपनी EMI नहीं दे सकते हैं, उनके पास आगे के लिए अपनी EMI स्थगित करने का विकल्प होगा. जबकि याचिका करने वालों का कहना है कि इसका कोई फायदा लोगों को नहीं मिल रहा है क्योंकि जो अपने EMI स्थगित कर रहे हैं तो उन्हें इस स्थगन की अवधि का पूरा ब्याज देना पड़ रहा है.

सरकार और RBI की तरफ से दलील रखते हुए 10 सितंबर को तुषार मेहता ने कोर्ट में कहा था कि ब्याज पर छूट नहीं दे सकते हैं, लेकिन भुगतान का दबाव कम कर देंगे. मेहता ने कहा था कि बैंकिंग क्षेत्र अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और अर्थव्यवस्था को कमजोर करने वाला कोई फैसला नहीं लिया जा सकता.

चूंकि, लोन मोरेटोरियम की अवधि खत्म हो गई है. ऐसे में लोगों के पास बैंकों से EMI चुकाने के लिए मैसेज, फोन कॉल्‍स और ई-मेल्‍स आने शुरू हो गए हैं. इससे लोगों को अपने बैंक लोन अकाउंट को नॉन परफॉर्मिंग एसेट घोषित किए जाने का डर सता रहा है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जब तक सरकार ठोस प्लानिंग नहीं बताती, तब तक यानी 31 अगस्त तक लोन डिफॉल्टरों को NPA घोषित ना करने का अंतरिम आदेश जारी रहेगा.

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