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भारत का स्वदेशी सुपर कंप्यूटर ताकतवर हो रहा है, कंप्यूटिंग स्पीड 45PF के लिए तीसरे चरण की तैयारी:

Sarvoday Times 6 years ago 1 minute read 0 comments
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भारत में बनाए गए स्वदेशी सुपर कंप्यूटर पहले से ज्यादा पावरफुल हो गए हैं। इस नेटवर्क को और ज्यादा शक्तिशाली किया जा रहा है। राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन (एनएसएम) लॉकडाउन के दौरान भी तेजी से काम करता रहा। फिलहाल हमारी कंप्यूटिंग स्पीड 16 पेटाफ्लॉप्स है, इसे 45 पेटाफ्लॉप्स करने के लिए तीसरे चरण की शुरुआत जनवरी 2021 से होगी। भारत की टेक्नोलॉजी के इतिहास में यह एक बड़ा कदम हुआ।

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एनएसएम के पहले चरण के लिए नियोजित बुनियादी ढ़ांचे की स्‍थापना पहले ही हो चुकी है और दूसरे चरण का काफी काम हो चुका है। देश में सुपर कंप्यूटरों का नेटवर्क जल्द ही लगभग 16 पेटाफ्लॉप्स (पीएफ) तक पहुंच जाएगा। तीसरे चरण की शुरुआत जनवरी 2021 में होगी जिससे कंप्यूटिंग गति लगभग 45 पेटाफ्लॉप तक पहुंच जाएगी।

एनएसएम को इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) द्वारा संयुक्त रूप से संचालित किया जा रहा है। इसे प्रगत संगणन विकास केंद्र (सीडैक) पुणे और भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) बेंगलूरु द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है।

स्‍वदेशी तौर पर असेंबल किए गए पहले सुपर कंप्‍यूटर परम शिवाय को आईआईटी (बीएचयू) में स्थापित किया गया था। उसके बाद परम शक्ति को आईआईटी खड़गपुर में और परम ब्रह्म को आईआईएसईआर पुणे में स्थापित किया गया था।

उसके बाद दो अन्‍य संस्थानों में सुपरकंप्यूटिंग सुविधाएं स्थापित की गईं और पहले चरण के तहत एक की स्‍थापना की जा रही है। इस प्रकार पहले चरण के तहत उच्च शक्ति कंप्यूटिंग गति को 6.6 पीएफ तक बढ़ाया गया। दूसरे चरण में 8 अन्‍य संस्थानों को अप्रैल 2021 तक सुपरकंप्यूटिंग सुविधाओं से लैस किया जाएगा जहां कुल 10 पीएफ की कंप्‍यूटिंग क्षमता होगी।

भारत में असेंबलिग एवं विनिर्माण के साथ सुपरकंप्यूटिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर की स्थापना के लिए देश के कुल 14 प्रमुख संस्थानों के साथ समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इनमें आईआईटी, एनआईटी, नेशनल लैब्स और आईआईएसईआर शामिल हैं। इनमें से कुछ संस्‍थानों में सुपर कंप्‍यूटर पहले ही स्‍थापित किए जा चुके हैं और जबकि कुछ अन्‍य संस्‍थानों में इस साल दिसंबर तक सुपर कंप्‍यूटर स्‍थापित कर दिए जाएंगे। दूसरे चरण की स्थापना अप्रैल 2021 तक पूरी हो जाएगी।

तीसरे चरण पर काम 2021 में शुरू होगा और इसमें 3 पीएफ की तीन प्रणालियों और 20 पीएफ की एक प्रणाली को राष्ट्रीय सुविधा के रूप में शामिल किया जाएगा।

इन तीनों चरणों के तहत लगभग 75 संस्थानों और सुपरकंप्यूटिंग व्‍यवस्‍था की रीढ़- राष्ट्रीय ज्ञान नेटवर्क (एनकेएन) के माध्यम से काम करने वाले हजारों सक्रिय शोधकर्ताओं एवं शिक्षाविदों को हाई परफॉर्मेंस कम्प्यूटिंग (एचपीसी) की सुविधा उपलब्‍ध होगी।

एचपीसी और कृत्रिम बुद्धिमत्‍ता (एआई) को एकीकृत किया गया है। सीडैक में एक 100 एआई पीएफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सुपरकंप्यूटिंग सिस्टम को तैयार कर स्थापित किया जा रहा है। यह बड़े पैमाने पर एआई वर्कलोड को संभाल सकता है जिससे एआई संबंधी कंप्यूटिंग की गति कई गुना बढ़ जाएगी।

इस मिशन ने अब तक 2,400 से अधिक सुपरकंप्यूटिंग मैनपावर और संकायों को प्रशिक्षित करके सुपरकंप्यूटर विशेषज्ञों की अगली पीढ़ी भी तैयार की है।

स्वदेशी क्षमता

एनएसएम द्वारा संचालित भारत के अनुसंधान संस्थानों का नेटवर्क उद्योग के सहयोग से प्रौद्योगिकी एवं विनिर्माण क्षमता को बढ़ा रहा है ताकि अधिक से अधिक पुर्जों का उत्‍पादन देश में ही किया जा सके। हालांकि पहले चरण में भारत में 30 प्रतिशत मूल्यवर्धन किया गया जिसे दूसरे चरण में 40 प्रतिशत तक बढ़ाया गया है।

सर्वर बोर्ड, इंटरकनेक्ट, प्रोसेसर, सिस्टम सॉफ्टवेयर लाइब्रेरी, स्टोरेज और एचपीसी-एआई कन्‍वर्ज्‍ड एक्‍सेलेटर जैसे पुर्जों को घरेलू तौर पर डिजाइन और विकसित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

भारत ने एक स्वदेशी सर्वर (रुद्र) विकसित किया है जो सरकार और सार्वजनिक उपक्रमों की एचपीसी संबंधी सभी आवश्यकताओं को पूरा कर सकता है। यह पहला अवसर है जब सीडैक द्वारा विकसित सॉफ्टवेयर स्टैक के साथ देश में कोई सर्वर सिस्‍टम बनाया गया है।

विशेषज्ञों ने कहा कि जिस गति से चीजें आगे बढ़ रही हैं उसे देखते हुए ऐसा लगता है कि हमारे पास जल्द ही भारत में विनिर्मित मदरबोर्ड और सब-सिस्टम हो सकते हैं। इस प्रकार सुपर कंप्यूटर का स्वदेशी तौर पर डिजाइन और विनिर्माण हो सकता है।

भारत में डिजाइन और विनिर्मित अधिकांश पुर्जों के साथ स्वदेशी तौर पर तैयार इन सुपर कंप्‍यूटरों को आईआईटी मुंबई, आईअआईटी चेन्‍नई और दिल्ली के इंटर-यूनिवर्सिटी एक्सेलेरेटर सेंटर (आईयूएसी) और सीडैक पुणे जैसे संस्‍थानों में स्थापित किया जाएगा। इसे दूसरे चरण के तहत कवर किया जाएगा। इससे पूरी तरह देश में विकसित एवं विनिर्मित सुपरकंप्‍यूटर की ओर बढ़ने और इस क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने का मार्ग प्रशस्‍त होगा।

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