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छत्तीसगढ़ की बघेल सरकार का किसानों को तोहफा, 1 दिसम्बर से एमएसपी पर धान खरीदी होगी शुरू :-

Sarvoday Times 6 years ago 1 minute read 0 comments
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एक दिसम्बर से भूपेश सरकार समर्थन मूल्य पर धान खरीदी आरंभ कर रही है. राज्य में धान की खरीदी राजनीति और सामाजिक मुद्दा रहा है. भूपेश बघेल सरकार कोरोना संकट के बावजूद भी धान खरीदी में किसी भी तरह की कमी नहीं आने देना चाह रही है. दरअसल छत्तीसगढ़ राज्य की प्रमुख फसल धान हैं. इसलिए छत्तीसगढ़ राज्य को धान का कटोरा कहा जाता है. छत्तीसगढ़ धान खरीदने के लिए केन्द्र सरकार से डिमाण्ड के अनुसार बारदाना न मिलने के बाद भी अपने स्तर पर बारदाने की जुटाने की कवायद में जुटी है |

किसानों से धोखाधड़ी और गंगाजल की कसम अपमान करने वालों को प्रधानमंत्री से  समर्थन मूल्य पर गारंटी मांगते हुए शर्म आनी चाहिए : भाजपा – Etoinews

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने सत्ता की बागडोर संभालते हुए राज्य के 17 लाख 82 हजार किसानों का लगभग 9 हजार करोड़ रूपए का कृषि ऋण माफ कर और 2500 रूपए समर्थन मूल्य पर धान खरीदी शुरू कर किसानों से किए अपने वायदे को पूरा किया था. छत्तीसगढ़ सरकार ने खरीफ विपणन वर्ष 2018-19 में 2500 रूपए क्विंटल मूल्य पर राज्य के किसानों से 80.37 लाख मीट्रिक टन और खरीफ विपणन वर्ष 2019-20 में समर्थन मूल्य पर 83.94 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी का नया कीर्तिमान रचा था |

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने किसानों के हित में एक और निर्णय लिया, वह था किसानों के उपर बकाया सिंचाई कर की माफी. राज्य के 17 लाख से अधिक किसानों पर बकाया सिंचाई कर की 244.18 करोड़ रूपए के कर माफ कर दिया गया. इसके साथ ही कृषि भूमि के अधिग्रहण पर मुआवजा राशि को दोगुना से बढ़ाकर चार गुना करने के साथ ही राज्य के 5 लाख से अधिक किसानों को निःशुल्क एवं रियायती दर पर बिजली उपलब्ध कराकर सालाना लगभग 900 करोड़ रूपए की राहत दी गई |

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने किसानों से 2500 रूपए क्विंटल में धान खरीदी का वायदा किया था. खरीफ विपणन वर्ष 2019-20 में जब फिर से 2500 रुपए समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की बारी आई तो केंद्र सरकार ने 2500 रुपये समर्थन मूल्य में धान खरीदने पर सेंटर पूल से चावल नहीं खरीदने का अड़ंगा लगा दिया. ऐसी स्थिति में छत्तीसगढ़ सरकार ने किसानों को उनकी उपज का वाजिब हक एवं उनकी उपज का मूल्य दिलाने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी की पुण्य तिथि 21 मई 2020 से राजीव गांधी किसान न्याय योजना शुरू की |

इस योजना में धान के साथ मक्का एवं गन्ना उत्पादक कृषकों को प्रति एकड़ के मान से प्रोत्साहन राशि दिए जाने का प्रावधान है. यह योजना कमोबेश ओड़िशा एवं आन्ध्रप्रदेश की किसान हितैषी योजना के जैसी है. इस योजना के तहत राज्य के 19 लाख किसानों को 5750 करोड़ रूपए की प्रोत्साहन राशि चार किश्तों में दी जा रही है. अब तक तीन किश्तों में किसानों को 4500 करोड़ रूपए की मदद सीधी मदद दी जा चुकी है |
राजीव गांधी किसान न्याय योजना से लाभान्वित होने वालों में 90 प्रतिशत लघु सीमांत अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति पिछड़ा वर्ग एवं गरीब तबके के किसान है. राजीव गांधी किसान न्याय योजना के जरिए राज्य के किसानों को मौके पर मिली मदद ने खेती-किसानी के लिए संजीवनी का काम किया है. किसानों की आर्थिक स्थिति बेहतर हुई है |

छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा राज्य में पशुधन को संरक्षित एवं संवर्धित करने, गांवों में रोजगार और आर्थिक गतिविधियों के साथ ही जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए गोधन न्याय योजना की शुरू की है. 20 जुलाई 2020 को हरेली पर्व के दिन से छत्तीसगढ़ राज्य में शुरू ही गोधन न्याय योजना के जरिए ग्रामीणों, किसानों और गो-पालकांे से 2 रुपये किलो में गोबर खरीदा जा रहा है. राज्य अब तक 6 हजार 430 गौठान बनाए गए हैं, जहां अब तक 26 लाख 76 हजार क्विंटल गोबर की खरीदी की गई है, जिसके एवज में सरकार ने पशुपालकों एवं ग्रामीणों को 53 करोड़ से अधिक की राशि का भुगतान किया हैछत्तीसगढ़ सरकार द्वारा राज्य में पशुधन को संरक्षित एवं संवर्धित करने, गांवों में रोजगार और आर्थिक गतिविधियों के साथ ही जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए गोधन न्याय योजना की शुरू की है. 20 जुलाई 2020 को हरेली पर्व के दिन से छत्तीसगढ़ राज्य में शुरू ही गोधन न्याय योजना के जरिए ग्रामीणों, किसानों और गो-पालकांे से 2 रुपये किलो में गोबर खरीदा जा रहा है. राज्य अब तक 6 हजार 430 गौठान बनाए गए हैं, जहां अब तक 26 लाख 76 हजार क्विंटल गोबर की खरीदी की गई है, जिसके एवज में सरकार ने पशुपालकों एवं ग्रामीणों को 53 करोड़ से अधिक की राशि का भुगतान किया है |

केन्द्र सरकार के तीन नए कृषि कानूनों से किसानों एवं आम नागरिकों के हितों पर हो रहे कुठाराघात के चलते छत्तीसगढ़ सरकार ने कृषि उपज मंडी अधिनियम में संशोधन कर उन्हें रक्षा कवच प्रदान किया है. 27 अक्टूबर 2020 को छत्तीसगढ़ सरकार ने विधानसभा का विशेष सत्र आहूत कर मंडी अधिनियम में संशोधन का प्रस्ताव पारित कर कृषि उपज के क्रय-विक्रय पर निगरानी, डीम्ड मंडी एवं इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म की स्थापना का प्रावधान किया गया है. इसके जरिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ में किसानों के साथ अन्याय न होने देने के अपने संकल्प को पूरा किया है |

समर्थन मूल्य पर धान बेचने के लिए राज्य की दो हजार से अधिक सहकारी समितियों में 21 लाख 48 हजार 606 किसानों ने अपना पंजीयन कराया है, जिसमें दो लाख 49 हजार 80 नए किसान शामिल हैं. पंजीयन कराने वाले किसानों के द्वारा बोये गए धान का रकबा 27 लाख 59 हजार 404 हेक्टेयर है. इस साल छत्तीसगढ़ में धान के रकबे में 73 हजार 387 हेक्टेयर यानि 2.73 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. वर्ष 2019 में धान बेचने के लिए पंजीयन कराने वाले किसानों की संख्या 19 लाख 55 हजार 236 थी |

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