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सरकार GST चोरी करने वालोँ के खिलाफ सख्त, सात हजार पर कार्रवाई, 185 हुए अरेस्ट

Sarvoday Times 6 years ago 1 minute read 0 comments
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सरकार ने विभिन्न एजेंसियों से प्राप्त आंकड़ों और सूचनाओं के आधार पर माल एवं सेवाकर (जीएसटी) चोरी करने वालों के खिलाफ सख्ती का अभियान चलाया है। इस अभियान के तहत 7,000 उद्यमियों के खिलाफ कार्रवाई की गई जिसमें 187 को गिरफ्तार किया गया है। वित्त सचिव अजय भूषण पांडे ने रविवार को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस अभियान के चलते सरकार के कर राजस्व में तेजी से सुधार आया है। सरकार को दिसंबर 2020 में 1.15 लाख करोड़ रुपये की जीएसटी प्राप्ति हुई। यह राशि किसी एक महीने में अब तक की सबसे अधिक जीएसटी प्राप्ति है। इसके लिये कर चोरों के खिलाफ की जा रही कार्रवाई और अर्थव्यवस्था में आ रहे सुधार को मुख्य वजह माना जा रहा है।

पांडे ने कहा कि पिछले डेढ़ माह के दौरान जीएसटी के फर्जी बिलों के खिलाफ शुरू की गई कार्रवाई के चलते पांच चार्टर्ड अकाउंटेंट और एक कंपनी सचिव सहित कुल 187 गिरफ्तारियां हुई हैं। उन्होंने कहा, ‘‘इनमें से कई लोग जिनमें कुछ प्रबंध निदेशक भी हैं पिछले 40- 50 दिन से जेल में हैं। इनमें कुछ बड़ी कंपनियां भी हैं जो कि कई स्तरीय लेनदेन के जरिये फर्जी बिलों के घोटाले में लिप्त पाई गईं। ऐसा कर ये कंपनियां जीएसटी और आयकर की चोरी कर रहीं थी। इस लिये उनके खिलाफ भी मामले दर्ज किये गये हें।’’

पांडे ने कहा, ‘‘हमने 1.20 करोड़ के कर आधार में से 7,000 कर चोरी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की है। इस लिहाज से हमारी सफलता की दर काफी ऊंची है।’’ पांडे वित्त सचिव के साथ ही राजस्व सचिव भी हैं। उन्होंने कहा कि जो भी कार्रवाई की गई है वह सरकार की विभिन्न एजेंसियों से मिली जानकारी के आधार पर की गई है। इनमें आयकर विभाग, सीमा शुल्क इकाई और एफआईयू, जीएसटी विभाग तथा बैंक आदि शामिल हैं। यह कार्रवाई उन लोगों के खिलाफ की गई जिन्होंने व्यवस्था का दुरुपयोग किया है।

वित्त सचिव ने कहा कि एक अप्रैल से पांच करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार करने वाले सभी बी2बी लेनदेन पर ई- चालान को अनिवार्य कर दिया जायेगा। इससे पहले एक अक्ट्रबर 2020 से 500 करोड़ रुपये से अधिक कारोबार करने वाली कारोबारों के लिये इलेक्ट्रानिक बिल अनिवार्य किया गया जबकि एक जनवरी से 100 करोड़ रुपये से अधिक कारोबार करने वाली इकाईयों के लिये इसे अनिवार्य बनाया गया। पांडे ने कहा कि इस प्रावधान के जरिये मुखौटा कंपनियों को लक्ष्य बनाया गया है।

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