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जानें मोसाद के सबसे खूंखार कारनामे, 20 साल तक ढूंढ़-ढूंढ़कर दुश्‍मनों को मारा

Sarvoday Times 6 years ago 1 minute read 0 comments
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इजरायली सेना के एक बहुत तेजतर्रार अधिकारी रूवेन शिलोह को इसे स्थापित करने का श्रेय जाता है। मोसाद ऐसी एजेंसी है, जो एक देश के रहस्य दूसरे देशों तक पहुंचाने का काम भी करती है। इतना ही नहीं, इसके एजेंटों ने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन की मोनिका लेविंस्की के साथ बातचीत को रिकॉर्ड कर और इनके सहारे बिल क्लिंटन तक को ब्लैकमेल किया था।

मोसाद का पूरा एक विभाग जैविक और रासायनिक जहरों की खोज में लगा रहता है और इनके वैज्ञानिक हथियार भी बनाते हैं। ऐसा माना जाता है कि फिलीस्तीन नेता यासर अराफात को मोसाद ने ऐसा जहर देकर मारा था कि उसकी पहचान तक नहीं की जा सकी।

मोसाद के कारनामे…

1. ऑपरेशन रैथ ऑफ गॉड (खुदा का कहर)

1972 में म्यूनिख ओलंपिक के लिए दुनिया भर से खिलाड़ी इकट्ठा हुए थे। इसी दौरान इजराइल के 11 खिलाड़ियों को उनके होटल में मार दिया गया। इसका आरोप दो आतंकवादी संगठनों Black September और Palestine Liberation Organization पर लगा।

मोसाद ने इसका बदला लेने के लिए 11 लोगों की लिस्ट बनाई। फिर मोसाद ने एजेंटों ने कई देशों का प्रोटोकॉल तोड़ा और चुन-चुन कर इन अपराधियों को मारा। अपने टारगेट को निपटाने के पहले मोसाद टारगेट की फेमिली को बुके भेजता था। जिस पर लिखा होता था, ”ये याद दिलाने के लिए कि हम ना तो भूलते हैं, ना ही माफ करते हैं।” मोसाद के एजेंटों ने हर टारगेट को 11 बार गोली मारी। मरे हुए 11 इजराइली खिलाड़ियों में से हर एक की तरफ से। ये ऑपरेशन बीस साल तक चला। पूरे यूरोप में घूम-घूमकर मोसाद ने सभी को मारा।

2. दुबई में छिपे महमूद अल मबूह की हत्या

19 जनवरी 2010 को दुबई के होटल अल बुस्तान रोताना में एक मर्डर हुआ, जिसने इंटरनेशनल मीडिया में सनसनी फैला दिया। क्योंकि दस दिन लग गए थे दुबई पुलिस को ये निश्चित करने में कि ये मर्डर ही है। तब तक यही लग रहा था कि ये नैचुरल डेथ है। मरने वाले आदमी का नाम था महमूद अल मबूह। जो हमास के लिए हथियार की खरीद-बिक्री करता था और ऐसे लोग ब्रेन हैमरेज से नहीं मरते जो कि पोस्टमार्टम में आया था। फिर पता चला कि अल मबूह के पैर में सक्सिनीकोलीन का इंजेक्शन दिया गया था, जिससे पैरालाइसिस हो जाता है। फिर उसके मुंह पर तकिया रखकर सफोकेट कर दिया गया था।

मोसाद ने अल मबूह से 21 साल पुराना बदला लिया गया था। अल मबूह फिलिस्तीनी ग्रुप हमास के मिलिट्री विंग का फाउंडर था। उसपर 1989 में दो इजराइली सैनिकों को मारने का आरोप था। अल मबूह को अंदाजा जरूर था कि मरना तो है, पर ये अंदाजा नहीं था कि ऐसी जगह पर मारा जाएगा जो उसके लिए सेफ है और मारने वालों के लिए खतरनाक।

इस काम में मोसाद के 33 एजेंट लगे थे। स्क्वॉड का कोड नाम था सीजेरिया। फिलिस्तीन के एक पुराने शहर के नाम पर, जहां पर कुछ यहूदी शहीद हुए थे। एजेंटों ने इंग्लैंड, फ्रांस, आयरलैंड से लेकर सीरिया, अरब का पासपोर्ट बनवा रखा था। ये एजेंट अलग-अलग जगहों से दुबई आए और मार के चलते बने। जबतक दुबई पुलिस ये तय कर पाई कि ये हत्या ही है, ये लोग इजराइल पहुंच चुके थे।

3. सत्तर गोलियां

फिलिस्तीन के नेता यासिर अराफात का दाहिना हाथ खलील अल वजीर ट्यूनीशिया में रह रहा था। इसको मारना मोसाद की लिस्ट में था। इसके लिए 30 एजेंट काम में लगे। धीरे-धीरे कर सभी टूरिस्ट बनकर ट्यूनीशिया पहुंचे। कुछ ने तो बाकायदा वहां की आर्मी की यूनिफॉर्म पहन रखी थी। फिर सारे एजेंट अबू जिहाद के घर की तरफ पहुंचे। उस वक्त इजराइल का जहाज बोइंग 707 शहर के ऊपर मंडरा रहा था। उसने वहां के कम्युनिकेशन सिस्टम को ब्लॉक कर दिया था। हिट स्क्वॉड ने अबू के परिवार के सामने उसे 70 गोलियां मारीं थी।

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