Skip to content

Primary Menu
  • Home
  • बाइडन ने ट्रंप के अफगान शांति वार्ता की नीति में किया बदलाव, छह देशों को किया गया शामिल
  • देश
  • मुख्य समाचार
  • विदेश

बाइडन ने ट्रंप के अफगान शांति वार्ता की नीति में किया बदलाव, छह देशों को किया गया शामिल

Sarvoday Times 5 years ago (Last updated: 5 years ago) 1 minute read 0 comments
download (1)

काबूल, अमेरिकी राष्‍ट्रपति जो बाइडन के लिए अफगान-तालिबान शांति वार्ता को अंजाम तक पहुंचाना एक बड़ी चुनौती है। पूर्व राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप के शासनकाल में शुरू हुई इस वार्ता का मकसद अफगानिस्‍तान से अमेरिकी सैनिकों को वापस बुलाना था। उस वक्‍त  शांति वार्ता में अफगाननिस्‍तान सरकार और तालिबान के बीच अमेरिका एक प्रमुख किरदार था। शांति वार्ता की प्रक्रिया में पाकिस्‍तान से सक्रिय सहयोग की अपेक्षा की गई थी। अमेरिका में राष्‍ट्रपति चुनाव के बाद बाइडन राष्‍ट्रपति बने। बाइडन ने ट्रंप के अफगान शांति वार्ता की नीति में थोड़ा बदलाव करते हुए इसको आगे बढ़ाया। बाइडन ने इस प्रक्रिया में छह देशों को शामिल किया। खास बात यह है कि शांति प्रक्रिया में अमेरिका के विरोधी चीन और रूस भी शामिल हैं। इसके अलावा इस शांति प्रक्रिया में भारत, पाकिस्‍तान और तुर्की भी हैं। आइए जानते हैं कि शांति प्रक्रिया में रूस और चीन के शामिल होने के बाद अफगान शांति वार्ता का संतुलन कैसे बदल गया। मध्‍य एशिया में रूस और चीन की क्‍या है बड़ी दिलचस्‍पी। तालिबान पर इसका क्‍या असर होगा। चीन शांति प्रक्रिया की आड़ में क्‍या रचा रहा है बड़ी साजिश।

शांति वार्ता के जरिए मध्‍य एशिया में अपने हितों को साधने में जुटा रूस

  • शीत युद्ध के दौरान अफगानिस्‍तान एक ऐसा इलाका था, जहां अमेरिका और रूस यानी पूर्व सोवियत संघ आमने-सामने थे। सोवियत संघ के विघटन और शीत युद्ध की समाप्ति के बाद रूस की दिलचस्‍पी अफगानिस्‍तान में भले ही खत्‍म हो गई हो, लेकिन मध्‍य एशिया में उसके हित अभी भी बरकरार है। अफगान शांति वार्ता के लिए अमेरिका और रूस एक मंच पर आ गए हैं। मध्‍य एशियाई हितों के लिए अफगान शांति वार्ता रूस के लिए एक वरदान हो सकता है। हालांकि, विशेषज्ञ इसे एक जोखिम भरा भी मानते हैं। आइए जानते हैं कि मध्‍य एशिया में रूस के क्‍या आर्थिक और सामरिक हित हैं।
  • प्रो. हर्ष वी पंत का कहना है कि मध्‍य एशिया का इलाका रूस के लिए रणनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा के नजरिए से काफी अहम और उपयोगी है। रूस के लिए मध्‍य एशिया में शांति और स्थिरता के लिए अफगान में शांति बहाली बेहद जरूरी है। दरअसल, मध्‍य एशिया के तीन मुल्‍कों- किर्गिस्‍तान, ताजिकिस्‍तान, उजबेकिस्‍तान और कजाखिस्‍तान की सीमा रूस से छूती है। अफगानिस्‍तान में इस्‍लामिक स्‍टेट के लड़ाके बड़ी संख्‍या में मौजूद हैं। रूस को इस बात का भी भय है कि अगर अफगानिस्‍तान में स्‍थायी शांति समाधान नहीं होता तो यहां सक्रिय आतंकी समूह और तेजी से सक्रिय हो जाएंगे। इसके अलावा इस्‍लामिक स्‍टेट अपने पांव इन तीन देशों के जरिए रूस तक पसार सकता है।
  • उन्‍होंने कहा कि अगर अमेरिका की निकटता अफगान सरकार के साथ है तो रूस तालिबान के करीब है। रूस तालिबान को एक खास सहयोगी के तौर पर देखता है। दूसरे, रूस यह कभी नहीं चाहेगा कि अफगानिस्‍तान में अमेरिका का दबदबा बरकरार रहे या वहां कोई अमेरिकी मध्‍यस्‍थता वाली सरकार अस्तित्‍व में आए। ऐसे में रूस अपनी मौजूदगी जरूर बनाए रखना चाहेगा। यही कारण है कि रूस शांत‍ि वार्ता के जरिए एक नई व्‍यवस्‍था में अपने हितों को खोज रहा है। उन्‍होंने कहा कि रूस का अफगानिस्‍तान में निवेश बहुत कम है। रूस की यह रणनीति है कि तालिबान के साथ बेहतर संबंधों से आगे बढ़ा सकेगा।

बेल्‍ट एंड रोड प्रोजेक्‍ट को साधने में जुटा चीन

शांत‍ि योजना के जरिए चीन अपनी बेल्‍ट एंड रोड प्रोजेक्‍ट को साधने की कोशिश में जुटा है। चीन ने इसकी पहल खुद नहीं किया है, बल्कि वह पाक‍िस्‍तान के जरिए इसे आगे बढ़ा रहा है। पाकिस्‍तान ने अफगानिस्‍तान को चीन समर्थित प्रोजेक्‍ट में शामिल होने का न्‍योता दिया है। पाकिस्‍तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने हाल में अफगानिस्‍तान को चीन समर्थित प्रोजेक्‍ट को लेकर पहल की है। उन्‍होंने कहा कि पाकिस्‍तान इस प्रोजेक्‍ट का हिस्‍सा है और अफगानिस्‍तान को उसका फायदा होगा। चीन की इस योजना पर भारत अपनी आपत्ति जता चुका है। प्रो. पंत का कहना है कि अगर अफगानिस्‍तान इस दिशा में आगे बढ़ता है तो भारत की स्थिति काफी असहज होगी। उधर, चीन ने पाकिस्‍तान के जरिए अफगानिस्‍तान पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है। अगर चीन और पाकिस्‍तान अपने इस मिशन में सफल होते हैं तो इसका प्रभाव भारत पर जरूर पड़ेगा। इसलिए भारत को अपनी रणनीति इस लिहाज से तैयार करना चाहिए कि पाकिस्‍तान और चीन अपनी इस योजना में सफल न हो सकें।

About the Author

Sarvoday Times

Editor

View All Posts

Post navigation

Previous: असम के स्वास्थ्य मंत्री ने दिया अजीबोगरीब बयान, कहा- लोगों को कोरोना से बचने के लिए मास्क लगाने की जरूरत नहीं
Next: कैंसर से जूझ रही बॉलीवुड एक्ट्रेस किरण खेर की सेहत में हुआ सुधार

Related Stories

14091-honey-bee
  • उत्तर प्रदेश
  • दिल्ली
  • देश
  • मेन स्लाइड

करघे की खनक और शहद की मिठास लेकर दुनिया के बाजार में उतरेगा बागपत

Sarvoday Times 10 hours ago 0
e3fb39c6ae8f74a2b3b564335c59bf741748096939207487_original
  • उत्तर प्रदेश
  • दिल्ली
  • देश
  • मेन स्लाइड

योगी सरकार का दिव्यांगजनों को सशक्त बनाने पर जोर, हर विधानसभा क्षेत्र में लगेंगे कल्याण शिविर

Sarvoday Times 10 hours ago 0
1780413707-3418
  • उत्तर प्रदेश
  • दिल्ली
  • देश
  • मेन स्लाइड

योगी सरकार की मुफ्त कोचिंग ने गढ़ी सफलता की नई कहानी, यूपीपीएससी-2025 में 74 अभ्यर्थी सफल

Sarvoday Times 10 hours ago 0
| ReviewNews by AF themes.