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मुख्यमंत्री ने नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-5, 2020-21 में उ0प्र0 द्वारा उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल किए जाने पर राज्य की जनता को बधाई दी

Sarvoday Times 5 years ago (Last updated: 5 years ago) 1 minute read 0 comments
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-5, 2020-21 में उत्तर प्रदेश द्वारा उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल किए जाने पर राज्य की जनता को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-5, 2020-21 की यह उपलब्धियां स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार तथा महिला सशक्तीकरण सहित जीवन की सुगमता के लिए प्रदेश सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सफलता का उदाहरण हैं।  

यह जानकारी आज यहां देते हुए राज्य सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि विगत साढ़े चार वर्ष से अधिक की अवधि में महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान एवं स्वावलम्बन तथा कन्या भ्रूण हत्या रोकने के प्रयास सफल हुए हैं। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-5, 2020-21 में नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-4, 2015-16 के सापेक्ष राज्य के लिंगानुपात में प्रभावी वृद्धि हुई है। सर्वे के अनुसार वर्ष 2015-16 में लिंगानुपात (प्रति 1,000 पुरुषों पर महिलाओं की संख्या) 995 से बढ़कर वर्ष 2020-21 में 1,017 हो गया है।

नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-5, 2020-21 के अनुसार प्रदेश में खाना पकाने के लिए स्वच्छ ईंधन का इस्तेमाल करने वाले परिवारों तथा बेहतर सैनिटेशन सुविधा का उपयोग करने वाले परिवारों के प्रतिशत में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-4, 2015-16 में प्रदेश में खाना पकाने के लिए स्वच्छ ईंधन का इस्तेमाल करने वाले परिवारों का प्रतिशत 32.7 था, जो नवीनतम सर्वे में बढ़कर 49.5 प्रतिशत हो गया है। इसी प्रकार, बेहतर सैनिटेशन सुविधा का उपयोग करने वाले परिवारों का प्रतिशत 36.4 से बढ़कर 68.8 प्रतिशत हो गया है। यह राज्य सरकार द्वारा ‘प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना’ तथा ‘स्वच्छ भारत मिशन’ के प्रभावी क्रियान्वयन को अभिव्यक्त करता है।

प्रवक्ता ने बताया कि नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-4, 2015-16 में प्रदेश का टोटल फर्टिलिटी रेट 2.7 था, जो वर्तमान सर्वे में कम होकर 2.4 हो गया है।  संस्थागत प्रसव 67.8 प्रतिशत से बढ़कर 83.4 प्रतिशत हो गया है। नवजात शिशु मृत्यु दर (एन0एन0एम0आर0) 45.1 प्रतिशत से कम होकर 35.7 प्रतिशत तथा शिशु मृत्यु दर (आई0एम0आर0) 63.5 प्रतिशत से घटकर 50.4 प्रतिशत रह गई है।

प्रवक्ता ने बताया कि नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-5, 2020-21 के अनुसार गर्भावस्था के दौरान एनीमिया से प्रभावित होने वाली महिलाओं की संख्या में नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-4, 2015-16 की तुलना में 5.1 प्रतिशत की कमी आयी है, जो राष्ट्रीय स्तर पर दर्ज हुई 1.8 प्रतिशत की कमी से अधिक है। इसी प्रकार, प्रदेश में बच्चों के वृद्धि अवरोध (स्टण्टिंग) के मामलों में 6.6 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है, जो राष्ट्रीय स्तर पर दर्ज की गई कमी 2.9 प्रतिशत से अधिक है। राज्य में सामान्य से कम वजन के बच्चों के मामलों में 7.4 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह कमी 3.7 प्रतिशत रही।

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