उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने कहा कि लखनऊ में डॉ0 राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि पूर्वी उत्तर प्रदेश से आने वाले बड़ी संख्या में मरीजों की पहली पहुँच इसी संस्थान तक होती है। पहले बड़ी संख्या में ऐसे मरीज आते थे, जिन्हें डायलिसिस की आवश्यकता होती थी। आज प्रदेश के सभी 75 जनपदों में जिला अस्पतालों में 10-10 बेड की निःशुल्क डायलिसिस सुविधा उपलब्ध करायी जा चुकी है। मात्र 06 वर्ष की छोटी अवधि में संस्थान ने जिस गति से प्रगति की है, वह सराहनीय है।
मुख्यमंत्री जी आज यहाँ डॉ0 राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के षष्ठम स्थापना दिवस समारोह को सम्बोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने डॉ0 राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के 40 बेड युक्त इमरजेंसी मेडिसिन वॉर्ड, मातृ एवं शिशु चिकित्सालय में 100 मरीजों हेतु वेटिंग हॉल, मुख्य चिकित्सा भवन में अंग प्रत्यारोपण यूनिट, रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभाग में 4-डी सी0टी0 सिमुलेटर मशीन, 1.5 टेस्ला एम0आर0आई0 मशीन, न्यूक्लियर मेडिसिन विभाग के अन्तर्गत स्पेक्ट सी0टी0 मशीन, पी0एम0आर0 विभाग में नेविगेटेड आर0टी0एम0एस0 मशीन तथा इण्डोब्रोन्कियल अल्ट्रासाउण्ड मशीन का लोकार्पण किया।
मुख्यमंत्री जी ने विभिन्न तकनीकी पदों पर नवचयनित 194 अभ्यर्थियों को नियुक्ति-पत्र प्रदान किए। उन्होंने संस्थान में अपने दायित्वों का कुशलतापूर्वक निर्वहन करने वाले संकाय सदस्यों को सम्मानित किया। संस्था की वार्षिक प्रगति रिपोर्ट, प्रो0 अजय कुमार वर्मा की पुस्तक ‘सीओपीडी : सही जानकारी सही देखभाल’ व डॉ0 सौम्या सोनकर नाथ की पुस्तक ‘क्रिटिकल केयर पर्ल्स’ का विमोचन भी किया।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि वर्ष 2017 में यह प्रश्न सामने था कि यह अस्पताल रहेगा अथवा इसे संस्थान के रूप में विकसित किया जाएगा। उस समय असमंजस और आपसी विवाद की स्थिति थी। निर्णय लिया गया कि इसे संस्थान के रूप में परिवर्तित किया जाएगा। जो लोग संस्थान में कार्य करना चाहते हैं, उन्हें संस्थान में रखा जाएगा तथा अन्य कार्मिकों को उनकी इच्छा के अनुसार स्वास्थ्य विभाग के अन्य अस्पतालों में स्थानान्तरित किया जा सकता है। उस समय उन्होंने स्वयं संस्थान का दौरा किया था, लेकिन यह कल्पना नहीं थी कि कभी 20 बेड का यह सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र इतनी तेजी से विकसित होकर उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवा और चिकित्सा शिक्षा का उत्कृष्ट केन्द्र बनेगा तथा प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के विजन को धरातल पर उतारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए संसाधनों और फैकल्टी के योगदान से डॉ0 राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान 20 बेड के अस्पताल से 1,400 बेड के सुपर स्पेशियलिटी संस्थान में परिवर्तित हुआ है। साथ ही, 1,000 बेड का नया अस्पताल और 300 बेड का ट्रॉमा सेण्टर भी बनने जा रहा है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि हीलिंग, लर्निंग और डिस्कवरी एक साथ चलेंगे तभी कोई संस्थान सेण्टर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित होगा। डॉ0 राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान की 06 वर्ष की प्रगति इसलिए दिखायी दे रही है, क्योंकि यहाँ उपचार, शिक्षण और अनुसंधान तीनों क्षेत्रों में परिणाम सामने आए हैं। संस्थान में लिखे जा रहे शोध पत्र इसकी पुष्टि करते हैं। आने वाले वर्षों की चुनौतियों के लिए संस्थान को क्लीनिकल, अकादमिक और रिसर्च एक्सीलेंस के लिए स्वयं को तैयार करना होगा। अभी संस्थान की प्रारंभिक यात्रा है। इस यात्रा को आने वाले समय में और मजबूती देनी होगी।
मुख्यमंत्री जी ने संस्थान के दो फैकल्टी सदस्यों डॉ0 अजय कुमार वर्मा और डॉ0 एस0एस0 नाथ के प्रकाशनों के विमोचन का उल्लेख करते हुए कहा कि चिकित्सकों में लिखने की आदत होनी चाहिए। प्रत्येक मरीज अपने आप में एक प्रयोगशाला की तरह होता है। मरीज के प्रति चिकित्सक का व्यवहार भी उपचार और स्वस्थ होने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मरीज के साथ संवाद भविष्य के नवाचार और अनुसंधान के लिए महत्वपूर्ण सामग्री उपलब्ध करा सकता है। यदि चिकित्सक प्रत्येक बिन्दु को व्यवस्थित रूप से दर्ज करें, तो उससे बेहतर अनुसंधान परिणाम सामने आ सकते हैं।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि विगत कुछ समय से संस्थान के सम्बन्ध में शिकायतें कम आ रही हैं। पहले समाचार पत्रों में संस्थान से सम्बन्धित शिकायतें लगातार प्रकाशित होती थीं। सरकार को धन उपलब्ध कराने में परेशानी नहीं थी, लेकिन शिकायतें सुनते-सुनते अवश्य परेशानी होती थी। शिकायतों से मुक्ति तभी मिलती है, जब आम जनता संतुष्ट हो, उसे बेहतर सुविधाएँ मिलें और पूरी टीम मिलकर कार्य करे। उन्होंने संस्थान द्वारा स्थापना दिवस पर अपने कर्मठ कार्मिकों को सम्मानित किए जाने की सराहना करते हुए सम्मानित सभी फैकल्टी सदस्यों, रेजिडेंट चिकित्सकों, पैरामेडिक्स एवं अन्य कार्मिकों को बधाई दी।
नियुक्ति की प्रक्रिया जितनी पारदर्शी होगी, परिणाम उतने ही फलदायी होंगे। अच्छे लोगों का चयन न हो, चयन प्रक्रिया में विसंगतियाँ या भेदभाव हो तथा पारदर्शिता एवं शुचिता का अभाव हो, तो उसकी कीमत पूरे संस्थान को लम्बे समय तक चुकानी पड़ती है। एक व्यक्ति की गलती की कीमत संस्थान को चुकानी पड़ती है और उससे जुड़े सभी लोगों के सामने पहचान का संकट खड़ा हो जाता है।
यही स्थिति कभी उत्तर प्रदेश के सामने भी थी। एक व्यक्ति और एक परिवार की गलतियों की कीमत पूरे प्रदेश को पहचान के संकट, खराब कानून-व्यवस्था, अराजकता और भ्रष्टाचार के रूप में चुकानी पड़ती थी। आज पारदर्शी नियुक्ति प्रक्रिया का परिणाम है कि नए टेक्नीशियन और फैकल्टी सदस्यों को मंच पर सम्मानजनक ढंग से नियुक्ति पत्र प्रदान किए जा रहे हैं। नियुक्ति पत्र प्राप्त करने वाले लोग देश और प्रदेश के विभिन्न स्थानों से आ रहे हैं। यह भी पता चलता है कि आज कितने लोगों की पसंद उत्तर प्रदेश और उसके संस्थान बन रहे हैं।
इसी पारदर्शिता और शुचिता के बल पर विगत 09 वर्षों में उत्तर प्रदेश में 09 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी दी गई है। इतनी बड़ी संख्या में नियुक्तियों के बावजूद कोई व्यक्ति यह नहीं कह सकता कि उसकी नियुक्ति में भेदभाव हुआ अथवा किसी प्रकार का लेन-देन हुआ। नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता और शुचिता का सीधा प्रभाव राज्य की प्रगति पर पड़ता है।
विगत 09 वर्षों में उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को तीन गुना करने और प्रति व्यक्ति आय को भी तीन गुना करने में सफलता मिली है। इससे भी महत्वपूर्ण यह है कि आज उत्तर प्रदेश के नागरिकों के सामने पहचान का संकट नहीं है। वे देश-दुनिया में कहीं भी जाते हैं, तो सीना तानकर कहते हैं कि वह उत्तर प्रदेश से हैं और सामने वाला उनकी पहचान पर प्रश्न नहीं उठाता। इसी आत्मविश्वास के नए प्रतीक के रूप में डॉ0 राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान उभर रहा है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि संस्थान ने केवल अपनी फैकल्टी, पैरामेडिक्स और कार्मिकों को ही सम्मानित नहीं किया, बल्कि पिछले वर्षों में तय किए गए लक्ष्यों को भी पूरा करते हुए आगे बढ़ा है। आज ऑर्गन ट्रांसप्लाण्ट यूनिट का लोकार्पण किया गया है। बोन मैरो ट्रांसप्लाण्ट की सुविधा भी बहुत शीघ्र प्रारम्भ होने जा रही है। यह संस्थान की कार्ययोजना और आगे बढ़ने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। हमें बैठने के बजाय समय से दस कदम आगे चलकर सोचना होगा और उसी गति से कार्य करना होगा।
डॉ0 राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान ने किडनी ट्रांसप्लाण्ट के क्षेत्र में तेजी से अपनी क्षमता विकसित की है, जिससे बड़ी संख्या में मरीजों को लाभ मिलेगा। किडनी ट्रांसप्लाण्ट के लिए पहले लम्बी प्रतीक्षा सूची रहती थी। गरीब व्यक्ति के सामने ट्रांसप्लाण्ट के खर्च की चुनौती होती थी। आज ‘प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत योजना’, ‘मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना’ और ‘पंडित दीनदयाल उपाध्याय कैशलेस चिकित्सा सुविधा’ जैसी व्यवस्थाएँ उपलब्ध हैं। जहाँ किसी व्यक्ति को अन्य माध्यमों से सहायता नहीं मिल पाती, वहाँ मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से पर्याप्त धनराशि उपलब्ध करायी जाती है। लाभार्थी किसी भी इम्पैनल्ड अस्पताल में उपचार करा सकता है। आज चुनौती धन की नहीं, बल्कि प्रतीक्षा सूची को कम करने की है। संस्थान अन्य जटिल रोगों के उपचार के लिए भी स्वयं को तैयार कर रहा है।
जब वह पहली बार संस्थान आए थे, तब न्यूरोसर्जरी विभाग की ओर से गामा नाइफ सुविधा की माँग की गई थी। वर्तमान निदेशक ने इसमें रुचि लेते हुए इसे आगे बढ़ाया। आज संस्थान में रोबोटिक सर्जरी के साथ गामा नाइफ, ए0आई0-आधारित डायग्नोस्टिक, उन्नत इमेजिंग, टेलीमेडिसिन और डिजिटल हेल्थ की सुविधाएँ उपलब्ध करायी जा रही हैं। संस्थान ने शासन के समक्ष जो भी माँग रखी, सरकार ने उसे पूरा करने में कोई कोताही नहीं बरती।
संस्थान द्वारा प्रदेश के 10 जनपदों में वर्चुअल आई0सी0यू0 का संचालन किया जा रहा है, जहाँ हृदय से जुड़ी बीमारियों के मरीजों को सुविधा उपलब्ध करायी जा रही है। तकनीक तेजी से विकसित हुई है। यदि बड़े चिकित्सा संस्थान स्वयं को थोड़ा भी अद्यतन करें और रुचि लेकर टेलीमेडिसिन का विस्तार करें, तो तृतीयक चिकित्सा संस्थानों की भीड़ को टेली-कंसल्टेशन के माध्यम से कम किया जा सकता है। इससे गम्भीर रोगियों को अधिक समय दिया जा सकेगा और दूरदराज के गाँवों में चिकित्सकों की कमी को भी काफी हद तक पूरा किया जा सकेगा।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रदेश ने चिकित्सा एवं स्वास्थ्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार ने देश की आवश्यकता के अनुरूप नए मेडिकल कॉलेज स्थापित करने की योजना बनायी। पहले चरण में उत्तर प्रदेश के लिए 17 मेडिकल कॉलेज और गोरखपुर में एम्स स्वीकृत किया गया था, लेकिन तत्कालीन सरकार ने मेडिकल कॉलेज नहीं बनाए। गोरखपुर एम्स के लिए ऐसी भूमि उपलब्ध करायी गई, जिस पर सर्वोच्च न्यायालय से स्थगन आदेश था। यदि उसी भूमि पर निर्भर रहते तो एम्स का निर्माण सम्भव नहीं होता। वर्ष 2017 में जनता ने निर्णय दिया और प्रदेश में डबल इंजन सरकार बनने के बाद पुरानी भूमि को तत्काल वापस लेकर नई भूमि आवंटित की गई। आज गोरखपुर में एम्स सफलतापूर्वक संचालित है। रायबरेली एम्स की समस्या का भी समाधान किया गया।
प्रदेश में सरकारी और निजी क्षेत्र के कुल मेडिकल कॉलेजों की संख्या जो पहले 41 थी, वह अब बढ़कर 85 हो गई है। प्रदेश में दो एम्स संचालित हैं। एम0बी0बी0एस0 की सीटें 4,690 से बढ़कर 13,600 से अधिक हो गई हैं। पी0जी0 की सीटों में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। नर्सिंग कॉलेजों की संख्या पहले दो थी, जो अब 26 हो गई है तथा 33 नर्सिंग कॉलेज निर्माणाधीन हैं। यह प्रदेश के स्वास्थ्य ढांचे की रीढ़ है। सरकारी मेडिकल कॉलेजों में मेडिकल फैकल्टी की संख्या पहले 1,027 थी, जो बढ़कर 3,438 हो गई है। बड़ी संख्या में नई मेडिकल फैकल्टी की नियुक्ति की गई है और उन्हें बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए लगाया गया है।
प्रदेश के किसी भी मेडिकल कॉलेज ने जिस सुविधा के लिए प्रस्ताव दिया, राज्य सरकार ने उसे अस्वीकार नहीं किया। आज उत्तर प्रदेश ऐसा राज्य है, जहाँ पूँजीगत व्यय के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, आधारभूत ढांचे, उद्योग और आधुनिक तकनीक सहित किसी भी क्षेत्र में धन की कमी नहीं है। संस्थान जितनी स्पष्ट कार्ययोजना के साथ प्रस्ताव प्रस्तुत करते हैं, सरकार उतनी ही तेजी से उसे स्वीकृति देकर आवश्यक धनराशि उपलब्ध कराती है। पर्याप्त संसाधन मिलने पर संस्थान समय से पहले अपनी कार्ययोजना पूरी कर प्रगति के नए सोपान तय करते हैं।
आज का समय तकनीक का समय है। प्रत्येक क्षेत्र में सम्भावनाएँ हैं। हमें यह देखना होगा कि पारम्परिक चिकित्सा में कौन-कौन सी सम्भावनाएँ हैं, जिन्हें अपनाकर मरीजों को राहत दी जा सकती है और आधुनिक चिकित्सा में नई सम्भावनाओं को किस प्रकार आगे बढ़ाया जा सकता है। हमारे आसपास के देश हमारे ही डेटा के आधार पर शोध पत्र प्रकाशित करते हैं, जबकि हम अपने डेटा को संरक्षित नहीं कर पाते। हमारे पास प्रतिभा की कमी नहीं है। आज हमारे पास संसाधन, तकनीक और युवा कार्यबल है। आवश्यकता केवल दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ आगे बढ़ने की है। यही इच्छाशक्ति भारत को शक्ति बनने की दिशा में आगे ले जा रही है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में संक्रामक रोगों की चुनौती का उदाहरण सामने है। जापान ने वर्ष 1905 में जापानी इन्सेफेलाइटिस का टीका विकसित कर लिया था, लेकिन भारत में उसके आने में 100 वर्ष लग गए। वर्ष 2005 में यह वैक्सीन भारत में उपलब्ध हो सकी। इसके विपरीत कोविड जैसी चुनौती के दौरान प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन में भारतीय वैज्ञानिकों और फैकल्टी ने मात्र 09 माह में कोविड-19 के एक नहीं, बल्कि दो-दो टीके विकसित किए। भारत के नागरिकों को निःशुल्क वैक्सीन उपलब्ध कराने के साथ 100 मित्र देशों को भी वैक्सीन उपलब्ध कराने में भारत ने महत्वपूर्ण भूमिका निभायी।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार ने आई0आई0टी0 कानपुर के साथ मिलकर मेडटेक का सेण्टर ऑफ एक्सीलेंस विकसित करने की दिशा में कार्य प्रारम्भ किया है। एस0जी0पी0जी0आई0 में भी सेण्टर ऑफ एक्सीलेंस विकसित किया जा रहा है। प्रदेश में मेडिकल डिवाइस पार्क तेजी से विकसित हो रहा है और फार्मा पार्क का निर्माण भी प्रारम्भ हो चुका है। उत्तर प्रदेश, देश का सबसे बड़ा फार्मा बाजार है, लेकिन पहले यहां दवाओं का उत्पादन नहीं होता था और न ही पर्याप्त अनुसंधान एवं विकास गतिविधियाँ होती थीं। अब इस दिशा में कार्य प्रारम्भ हुआ है और इसके अच्छे परिणाम सामने आ रहे हैं। देशभर से लोग उत्तर प्रदेश में आकर इस क्षेत्र में कार्य करने की इच्छा व्यक्त कर रहे हैं।
इस क्षेत्र में ए0आई0 बड़ी मदद कर सकती है। चिकित्सा संस्थानों को आई0आई0टी0, ट्रिपल आई0टी0, आई0आई0एम0 जैसे तकनीकी एवं प्रबन्धन संस्थानों के साथ मिलकर कार्य करना चाहिए। राज्य सरकार ऐसे संस्थानों को सहयोग प्रदान कर रही है तथा संस्थानों से जुड़े पूर्व छात्रों को भी आमंत्रित कर उनके अनुभव और विशेषज्ञता का उपयोग किया जा रहा है। सरकार उत्तर प्रदेश को चिकित्सा, तकनीक और अनुसंधान के क्षेत्र में हब के रूप में विकसित करने के लिए हर सम्भव प्रयास कर रही है।
हमें समय से दस कदम आगे सोचने की क्षमता विकसित करनी होगी। बीमारी का स्वरूप बदल रहा है। उसके कारणों और उपचार के लिए उसी अनुरूप अनुसंधान को आगे बढ़ाना होगा। यदि हम समय के साथ अपडेट नहीं हुए तो कठिनाइयाँ बढ़ेंगी। चिकित्सा, तकनीक, अनुसंधान और नवाचार की भूमिका को साथ लेकर चलना होगा। केवल उपचार तक सीमित नहीं रहना है, बल्कि उपचार से जुड़े डेटा को भी संरक्षित करना है। यह डेटा भविष्य के लिए अत्यन्त उपयोगी होगा।
मुख्यमंत्री जी ने कोविड कालखण्ड को याद करते हुए कहा कि उस दौरान आई0आई0टी0 से कोविड की स्थिति को आरेख के माध्यम से प्रस्तुत करने को कहा जाता था। इससे आने वाले समय की सम्भावित स्थिति का अनुमान लगाया जाता था। भारत सरकार के समक्ष प्रस्तुतियों में भी इन आरेखों का उपयोग कर स्थिति को नियंत्रित करने की रणनीति बनायी गई। कोविड काल में फ्रण्टलाइन वर्करों, ए0एन0एम0, आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्त्रियों ने बहुत अच्छा कार्य किया। उन्होंने फील्ड में रहकर दस्तक अभियान चलाया और घर-घर स्क्रीनिंग की। प्रधानमंत्री जी के विजन और शासन की योजनाओं को जमीनी धरातल तक पहुँचाया। इसके परिणामस्वरूप उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में कोविड महामारी को प्रभावी रूप से नियंत्रित करने में सफलता मिली।
आज प्रदेश में लगभग 16 लाख सरकारी कर्मचारी हैं, जिनमें 09 लाख युवाओं को वर्तमान सरकार ने नियुक्त किया है। यह युवा कार्यबल प्रदेश के विकास को गति दे रहा है। जब गति होती है, तो प्रगति को कोई रोक नहीं सकता, क्योंकि नेतृत्व का विजन स्पष्ट है। आज संसाधनों का अभाव नहीं है। संस्थान कार्ययोजना के साथ अपनी माँग प्रस्तुत करेंगे, तो सरकार उसे पूरा करेगी। यदि संस्थान उपलब्ध संसाधनों का समय पर उपयोग नहीं कर पाता है, तो संस्थान पर प्रश्न खड़ा होगा। इसलिए संस्थान को तकनीकी रूप से सक्षम संस्थानों के साथ सहयोग और समन्वय करते हुए स्वयं को सेण्टर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित करना चाहिए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि डॉ0 राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान आने वाले समय में क्लीनिकल, अकादमिक एवं रिसर्च एक्सीलेंस के मॉडल सेण्टर के रूप में अपनी पहचान स्थापित करेगा।
कार्यक्रम को उप मुख्यमंत्री श्री ब्रजेश पाठक, चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री श्री मयंकेश्वर शरण सिंह, अपर मुख्य सचिव चिकित्सा शिक्षा, स्वास्थ्य, मातृ एवं शिशु कल्याण श्री अमित कुमार घोष ने भी सम्बोधित किया। निदेशक आर0एम0एल0 श्री सी0एम0 सिंह ने संस्थान की वार्षिक रिपोर्ट भी प्रस्तुत की।
इस अवसर पर डीन प्रो0 राजन भटनागर, सी0एम0एस0 प्रो0 विक्रम सिंह सहित संस्थान के वरिष्ठ आचार्य, सहायक आचार्य, चिकित्सक, अधिकारी, कर्मचारी एवं छात्र-छात्राएँ उपस्थित थे।