Skip to content
sarvoday times

Sarvoday Times

Latest News Portal & E-Paper

Primary Menu
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • राज्य
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • दिल्ली
    • बिहार
    • महाराष्ट्र
    • मध्य प्रदेश
    • चंडीगढ़
  • मनोरंजन
  • बिजनेस
  • खेल
  • क्राइम
  • गैजेट्स
  • जीवन शैली
  • E-Paper
  • Home
  • अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध जैसे हालात
  • विदेश

अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध जैसे हालात

Ranjeet Gupta 7 years ago (Last updated: 7 years ago) 1 minute read 0 comments
download-18

नई दिल्‍ली : ईरान के कुद्स फोर्स के प्रमुख मेजर जनरल कासिम सुलेमानी की मौत के बाद ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध जैसे हालात बनते जा रहे हैं. ईरान ने अमेरिका से बदला लेने की धमकी दी है, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान को बार-बार हमला न करने की चेतावनी दे रहे हैं. आप सोच रहे होंगे कि कि युद्ध हुआ तो बड़ा नुकसान ईरान का होगा। इस युद्ध में अमेरिका का कुछ बिगड़ने वाला नहीं है। ऐसे में यह देखना दिलचस्‍प होगा कि क्‍या इस युद्ध में केवल नुकसान ईरान का ही है। ऐसा नहीं है कि इस युद्ध में अमेरिका और उसके मित्र देशों का भी भारी नुकसान होगा।  इराक से लेकर ओमान तक यानी पूरे खाड़ी देशों में हजारों अमेरिकी सैनिकों का जमावड़ा है। अगर अमेरिका ने ईरान पर सीधा हमला किया तो उसके हजारों अमेरिकी सैनिकों को बड़ा खतरा उत्‍पन्‍न हो जाएगा। ईरान के पास एेसी मिसाइलें और दूसरे हथियार हैं, जो अगर ईरान ने अमेरिकी सैनिकों के खिलाफ इस्‍तेमाल किया तो अमेरिकी सैनिकों को भारी नुकसान हो सकता है। इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। केवल इराक़ में ही पांच हजार सैनिकों की तैनाती है। जाहिर है ईरान की नजर इन पांच हजार सैनिकों पर होगी । यह आशंका इसलिए प्रबल है क्योंकि अतीत में ईरान और उसके समर्थकों ने जवाबी कार्रवाई के तौर पर ऐसा किया है। 

इसके अलावा कई खाड़ी देशों में अमेरिका के पोर्ट, हार्बर और जंगी जहाजों की तैनाती है। ऐसे में ईरानी मिसाइल का निशाना ये अमेरिकी केंद्र भी हो सकते हैं। अगर ऐसा हुआ तो इस युद्ध का असर व्‍यापक होगा। यही वजह है कि सऊदी अरब और अरब अमीरात जैसे देश सहमे और डरे हुए हैं। इसके अलावा इसका असर यहां की अर्थव्‍यवस्‍था पर भी पड़ेगा। इसलिए अमेरिका चाहे युद्ध की कितनी ही धमकी दे, लेकिन ईरान के साथ सीधे जंग लड़ना उसके लिए एक बड़ी समस्‍या का न्‍यौता देने जैसा है। यही वजह है कि अमरीका और ईरान की लड़ाई तेज़ होती जा रही है, लेकिन अमरीका सीधे तौर पर ईरान पर हमला करने से बच रहा है।  
 

अमेरिका-ईरान में युद्ध छिड़ा तो किसका साथ देगा पाकिस्तान? सेना ने किया खुलासा

रान के कुद्स फोर्स के प्रमुख मेजर जनरल कासिम सुलेमानी की मौत के बाद ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध जैसे हालात बनते जा रहे हैं. ईरान ने अमेरिका से बदला लेने की धमकी दी है, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान को बार-बार हमला न करने की चेतावनी दे रहे हैं. इस बीच सवाल उठ रहे हैं कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध छिड़ा तो पाकिस्तान के किसके साथ खड़ा होगा? इसको लेकर पाकिस्तान ने कहा कि वह किसी भी देश को युद्ध के लिए अपनी जमीन का इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं देगा.

पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता आसिफ गफूर ने रविवार को पाकिस्तानी न्यूज चैनल एआरवाई न्यूज से बातचीत करते हुए कहा कि पाकिस्तान क्षेत्र में शांति स्थापित करने में सकारात्मक भूमिका निभाएगा और किसी के भी खिलाफ अपनी धरती का इस्तेमाल किए जाने की अनुमति नहीं देगा.’ आसिफ गफूर ने कहा कि प्रधानमंत्री इमरान खान और पाक आर्मी चीफ जनरल कमर जावेद बाजवा की भी यही रहा है.

पाक आर्मी प्रवक्ता ने कहा कि पीएम इमरान खान का भी यही कहना है कि पाकिस्तान किसी का और किसी के लिए पक्षकार नहीं बनेगा, लेकिन वह शांति के लिए सहयोगी बनेगा.

Post navigation

Previous: दिल्ली में विधानसभा चुनाव: आज चुनाव के तारीखों का ऐलान करेगा
Next: अमेरिका – ईरान में बीच छिड़ा युद्ध तो पाकिस्तान किसका साथ देगा ?

Related Stories

IMG-20260806-WA0567
  • उत्तर प्रदेश
  • दिल्ली
  • देश
  • विदेश

पिछड़ा वर्ग के आरक्षण पर जनप्रतिनिधियों से सीधे संवाद, सुझावों के आधार पर शासन को भेजी जाएंगी संस्तुतियां

Sarvoday Times 3 months ago 0
आरपीएफ व सीआईबी की संयुक्त कार्यवाही में रेलवे केबिल के साथ एक अभियुक्त गिरफ्तार
  • उत्तर प्रदेश
  • दिल्ली
  • देश
  • विदेश

आरपीएफ व सीआईबी की संयुक्त कार्यवाही में रेलवे केबिल के साथ एक अभियुक्त गिरफ्तार

Sarvoday Times 3 months ago 0
  • उत्तर प्रदेश
  • दिल्ली
  • देश
  • राज्य
  • विदेश

सीएम रेखा की बच्चियों को सौगात: साइकिल देकर पूछा- खुश हैं, छात्राएं बोलीं- यस मैम; ₹2500 पर कही ये बात

Sarvoday Times 3 months ago 0
| ReviewNews by AF themes.