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लॉकडाउन के कारण नदी गंगा के प्रदूषण में आई कमी। …..

Ranjeet Gupta 7 years ago 1 minute read 0 comments
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जो काम अब तक देश की कोई सरकारें नहीं कर पाई वो लॉकडाउन ने कर दिखाया। लॉकडाउन का ये शायद पहला और अब तक का सबसे बड़ा सकारात्मक परिणाम है कि राष्ट्रीय नदी गंगा के प्रदूषण में कमी आई है कोरोना वायरस की वजह से देश में चल रहे लॉकडाउन और कल-कारखानों के बंद होने के चलते गंगा के पानी में काफी सुधार देखने को मिल रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 24 मार्च से 21 दिनों के लॉकडाउन के बाद से गंगा के पानी में 40-50 प्रतिशत का सुधार हुआ है वहीं वाराणसी के स्थानीय लोगों के मुताबिक, लॉकडाउन की वजह से लोग गंगा स्नान नहीं कर रहे हैं और फैक्टरियां भी बंद हैं, इसकी वजह से गंगा का पानी बहुत साफ नजर आ रहा है।

लॉकडाउन की वजह से ऐसा बदलाव देखकर खुशी हो रही है। कानपुर के लोगों का भी गंगा को लेकर कुछ ऐसा ही मानना है बता दें कि तीन महीने पहले चीन के वुहान शहर से फैले कोरोना वायरस की वजह से दुनिया का हर बड़ा देश लॉकडाउन में है और पूरी तरह से बंद है। इस जानलेवा महामारी की वजह से अब तक दस लाख से अधिक लोग संक्रमित हुए हैं और कई लोगों की जान गई है। वहीं भारत में भी अब तक 3000 से अधिक संक्रमित हुए हैं और 75 मौतें हुई हैं बतादे की लॉकडाउन के कारण जहां देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान हो रहा है, वहीं भारत के धार्मिक-सांस्कृतिक अर्थशास्त्र की प्रमुख आधार गंगा के जल की गुणवत्ता तेजी से सुधर रही है वही इस का सबसे प्रमुख कारण कारखानों के साथ घाटों पर स्नान और अन्य गतिविधियों का बंद होना है

गंगाजल में फिक्कल कोलीफार्म की मात्रा का स्तर प्रति सौ एमएल में 15 हजार से घट कर 11 हजार तक आ गई है जबकि पीएच का स्तर 3.5 से अधिक हो गया है। लॉकडाउन से पहले गंगा जल के परीक्षण में यह मात्रा काफी कम थी। गंगा जल में घुलित ऑक्सीजन की मात्रा प्रति लीटर तीन एमजी तक पहुंच गई है। यह मात्रा एक माह पहले अस्सी संगम पर शून्य से भी नीचे चली गई थी। बीओडी एक एमजी प्रति लीटर हो गई है पर्यावरणविद प्रो बीडी. त्रिपाठी का कहना है कि अनेक कोशिशों के बाद भी सर्वाधिक कानपुर में औद्योगिक गंदगी गंगा में मिलती है। अविरलता में कमी के कारण गंगा में उसका दुष्प्रभाव काशी तक दिखता है। लॉकडाउन की वजह से औद्योगिक कचरे के उत्सर्जन में कमी आई है वहीं, काशी में रामनगर से शिवाला घाट के बीच कई स्थानों से प्रदूषित जल गंगा में मिलता है।

इन दिनों रामनगर की औद्योगिक इकाइयों से लेकर कपड़ा रंगाई के कारखाने बंद हैं। उसका सीधा असर गंगा पर पड़ रहा है। जल में प्रदूषण की मात्रा स्वाभाविक रूप से कम हो गई है। जल की गुणवत्ता में सुधार जलीय जीवों के लिए भी लाभप्रद होगा केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड रीयल टाइम वॉटर मॉनिटरिंग भी कराता है। गंगा के पूरे प्रवाह पथ में 36 स्थानों पर मॉनीटरिंग सेंटर बने हैं। उनमें 27 स्थानों पर गंगाजल पूर्ण रूप से नहाने के योग्य हो गया है। लॉकडाउन के पहले सिर्फ छह स्थानों पर ही गंगाजल नहाने लायक था।

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