Skip to content
sarvoday times

Sarvoday Times

Latest News Portal & E-Paper

Primary Menu
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • राज्य
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • दिल्ली
    • बिहार
    • महाराष्ट्र
    • मध्य प्रदेश
    • चंडीगढ़
  • मनोरंजन
  • बिजनेस
  • खेल
  • क्राइम
  • गैजेट्स
  • जीवन शैली
  • E-Paper
  • Home
  • महाराष्ट्र: मेडिकल छात्रों के अभिभावकों ने संस्थानोंद्वारा फीस मांगे जाने का किया विरोध
  • देश
  • महाराष्ट्र
  • मुख्य समाचार
  • मेन स्लाइड

महाराष्ट्र: मेडिकल छात्रों के अभिभावकों ने संस्थानोंद्वारा फीस मांगे जाने का किया विरोध

Sarvoday Times 6 years ago 1 minute read 0 comments
students

महाराष्ट्र के कई मेडिकल छात्रों के अभिभावकों ने मेडिकल संस्थानोंद्वारा फीस मांगे जाने का विरोध किया है। विरोध करते हुए अभिभावकों ने कहा कि, ‘हॉस्टल और मेस की सुविधाओं के लिए पूरी फीस का भुगतान क्यों करें जबकि पिछले साल लॉकडाउन के कारण इन सुविधाओं का इस्तेमाल किया ही नहीं गया।’ जी दरअसल पुणे स्थित प्राइवेट मेडिकल कॉलेज के एक छात्र के माता-पिता ने हाल ही में कहा कि, ‘मार्च 2020 से मेरा बेटा घर से ही पढ़ाई कर रहा है। मई के बाद से दूसरे, तीसरे और चौथे वर्ष के मेडिकल छात्र कोविड ड्यूटी पर थे, इसलिए वो हॉस्टल में रहे ही नहीं, तो फिर हम उन सेवाओं के लिए भुगतान क्यों करें, जिनका इस्तेमाल किया ही नहीं गया?’।

इसके अलावा भी कुछ अभिभावकों ने कॉलेज प्रबंधन के सामने अपने सवालों को उजागर किया। वहीँ कुछ संस्थानों ने फीस में छूट की पेशकश की है तो कुछ ने किश्तों में भुगतान करने का विकल्प दिया है। हाल ही में नासिक स्थित प्राइवेट मेडिकल कॉलेज के एक छात्र के माता-पिता ने कहा, ‘हॉस्टल और मेस की फीस लगभग 1।45 लाख रुपये प्रति वर्ष है। हमारी शिकायतों के बाद संस्थान ने फीस में 15,000 रुपये की छूट देने पर सहमति व्यक्त की है, हालांकि ये हमारे लिए पर्याप्त नहीं है’।

इसके अलावा प्राइवेट मेडिकल कॉलेज के निदेशक का कहना है, ‘मेडिकल संस्थानों में लॉकडाउन के दौरान भी खर्चा होता रहा। किसी भी कर्मचारी को नौकरी से निकाला नहीं गया और न ही उनकी सैलरी काटी गई। क्योंकि हमारा स्टाफ जहां एक ओर ऑनलाइन क्लासेस ले रहा था, वहीं दूसरी ओर कोविड-19 अस्पतालों का भी संचालन कर रहा था। हमें अपने कर्मचारियों को सैलरी देने और संस्थान के रखरखाव को बनाए रखने के लिए फीस की जरूरत पड़ती है’।

इसी के साथ कार्यकर्ता और एक मेडिकल छात्र की मां सुधा शेनॉय ने कहा, ‘पूरी फीस की मांग से सभी माता-पिता परेशान नहीं हैं। लगभग सभी राज्य के कॉलेजों ने 2020 में फीस की मांगी की थी और उन्होंने अभिभावकों को फीस देने के लिए पर्याप्त समय भी दिया। संस्थानों द्वारा यह कहा गया था कि स्टाफ को सैलरी देने और हॉस्टल के रखरखाव का खर्च उठाने के लिए फीस की जरूरत है’।

Post navigation

Previous: केरल युवा आयोग महिलाओं को प्रदान करेगी नि: शुल्क मार्शल आर्ट प्रशिक्षण
Next: दिल्ली-एनसीआर के कई इलाकों में बारिश या बूंदाबांदी से दिन कीहुई शुरुआत, गुरुग्राम में गिरे ओले

Related Stories

MMP_9268
  • उत्तर प्रदेश
  • मुख्य समाचार

मुख्यमंत्री ने डॉ0 राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के पांचवें दीक्षान्त समारोह को सम्बोधित किया

Sarvoday Times 2 weeks ago 0
DSC_2399.JPG
  • उत्तर प्रदेश
  • मुख्य समाचार

मुख्यमंत्री ने एच0सी0एल0 टेक के एच0सी0एल0 आई0टी0 सिटी लखनऊ

Sarvoday Times 4 weeks ago 0
images (7)
  • उत्तर प्रदेश
  • मुख्य समाचार

ग्रीन कॉरिडोर की तर्ज पर फैजुल्लागंज से नैमिष तक बनेगा तटबंध: मुख्यमंत्री योगी

Sarvoday Times 4 weeks ago 0
| ReviewNews by AF themes.