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सॉफ्ट सिग्नल और अंपायर्स कॉल लेकर इस खिलाडी ने दिया तर्क, बताया किसे लेना चाहिए फैसला

Sarvoday Times 5 years ago 1 minute read 0 comments
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Ind vs Eng: खेल की शीर्ष दो टीमों के बीच होने जबरदस्त टी20 सीरीज खत्म हो चुकी है। एकतरफा टेस्ट सीरीज के बाद टी20 सीरीज ने दर्शकों को रोमांचित किया। दुर्भाग्य से दर्शक सिर्फ पहले दो मैचों के लिए शानदार नरेंद्र मोदी स्टेडियम जा सके थे, जिसके बाद गुजरात क्रिकेट संघ ने बाकी तीन मैचों के लिए किसी भी तरह की भीड़ नहीं जुटाने का सही फैसला लिया। इसके लिए दर्शकों को सिर्फ खुद को दोषी ठहराया चाहिए, क्योंकि उन्होंने मास्क पहनने और शारीरिक दूरी बनाए रखने के नियमों की अनदेखी की। कोविड महामारी पर विजय पाने के लिए ऐसा करना महत्वपूर्ण है जो हमें चिकित्सा विशेषज्ञ बताते हैं।

कैमरे की सुविधा के साथ स्मार्टफोन के आगमन के बाद किसी के फोटो को कैप्चर करने के प्रलोभन का विरोध करना और फिर उसे दोस्तों के साथ साझा करना असंभव है। किसी आयोजन में नजर आना भी बड़ी बात है और इसलिए अपने दोस्तों को यह दिखाने के लिए कि आप क्रिकेट स्टेडियम में हैं, इसे रोक पाना मुश्किल है। यदि टीवी कैमरा आपको दिखाता है तो यह आपके लिए अतिरिक्त बोनस है, क्योंकि आपको ना सिर्फ आपके दोस्त और परिवार के लोग देखते हैं, बल्कि वे लाखों लोग भी देखते हैं जो मैदान पर एक्शन देख रहे हैं। इसलिए इसमें कोई आश्चर्य नहीं था कि मास्क हटे हुए थे और दो लोगों के बीच दूरी मुश्किल से कायम रखी जा रही थी।

याद रखना चाहिए कि नरेंद्र मोदी स्टेडियम दुनिया में सबसे बड़ा है, जिसकी क्षमता 1,30,000 से अधिक लोगों की है और इसमें पहले दो मैचों के लिए 50 प्रतिशत लोगों के लिए अनुमति दी गई थी। यहां तक कि अगर उन 65,000 की क्षमता में से 10वां हिस्सा भी कोविड प्रोटोकॉल का उल्लंघन करता है तो महामारी के ताजे चरण का खतरा बनता है और इसलिए जीसीए द्वारा अंतिम तीन मैचों के लिए किसी भी दर्शक को अनुमति नहीं देना एक अच्छा फैसला है। यह टीवी अधिकार धारकों के लिए एक बोनस होना चाहिए, क्योंकि इन मैचों के लिए दर्शकों की संख्या में वृद्धि होगी।

टेस्ट मैचों के जल्दी खत्म होने के बाद टी-20 सीरीज में जिस तरह की प्रतिक्रिया रही उम्मीद है उससे कुछ ऐसा मिला होगा जो टेस्ट मैचों के दिनों में खो गया था। मैचों के अनिश्चित अंत के कारण अंपायर काफी दबाव में आ गए हैं और उन पर स्पॉटलाइट जमकर बरसी। उन्हें श्रेय जाना चाहिए कि वे ज्यादातर समय शानदार रहे और बल्लेबाजों, गेंदबाजों और क्षेत्ररक्षकों ने अजीब गलती कीं और वे अंपायर हैं और इंसान हैं।

पिछले कुछ समय से अंपायर कॉल पर बहस चल रही है। ऐसे लोग हैं जो महसूस करते हैं कि अगर एलबीडब्ल्यू के फैसले को टीवी अंपायर के पास भेजा जाता है तो उन्हें सिर्फ यह देखना चाहिए कि गेंद स्टंप्स से टकरा रही है या नहीं। हालांकि उस निर्णय के कुछ अन्य तत्व भी हैं जिन पर भी गौर करने की आवश्यकता है और वे ये हैं कि गेंद ऑफ स्टंप के बाहर बल्लेबाज के पैड पर लगी है या नहीं, या गेंद लेग स्टंप के बाहर पिच हुई है या नहीं, या बल्लेबाज का किनारा लगने के बाद गेंद पैड पर लगी है या नहीं।

इसके बाद आती है हॉकआइ और गेंद की दिशा। यदि मैदानी अंपायर आउट देता है तो टीवी अंपायर को उस फैसले को बरकरार रखने के लिए यह जरूरी है कि आधी से ज्यादा गेंद स्टंप्स पर लगे। यदि मैदानी अंपायर नॉट आउट का फैसला देता है तो फिर उस फैसले को पलटने के लिए आधी से अधिक गेंद को स्टंप्स पर लगते हुए नजर आना जरूरी है। अंपायर द्वारा नॉट आउट कॉल महत्वपूर्ण है क्योंकि अगर गेंद स्टंप्स पर लगती या नहीं, तो अधिकांश टेस्ट मैच तीन दिन या उससे कम समय में खत्म हो जाएंगे।

मैदान के नजदीकी कैच के लिए टीवी अंपायर का रेफरल महत्वपूर्ण है। यदि मैदानी अंपायर निश्चित नहीं है और उसका सॉफ्ट सिग्नल वह है जो टीवी अंपायर को इसके खिलाफ ही तय करना होगा अगर इसके विपरीत सबूत हों। यदि मैदानी अंपायर निश्चित नहीं हैं और उसका सॉफ्ट सिगनल वह है जो टीवी अंपायर को इसके खिलाफ ही तय करना होगा, अगर इसके विपरीत सबूत हों। यह मैदानी अंपायर के लिए पूरी तरह से उचित है कि वह हमेशा यह देखने के लिए सबसे अच्छी स्थिति में नहीं होता है कि कैच कैसे पूरा हुआ और इसलिए वह अपने सॉफ्ट सिग्नल के साथ टीवी के सामने मौजूद अपने सहयोगी को इसे भेजता है।

वर्तमान नियम निष्पक्ष है और उन्हें सिर्फ इसलिए बदलने की कोई आवश्यकता नहीं है क्योंकि एक धारणा है कि कुछ करीबी फैसले घरेलू पक्ष के खिलाफ गए थे। हर तरह से इसे टीवी अंपायर बदल सकते हैं, लेकिन नियम बदलने की जरूरत नहीं है।

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