Skip to content
sarvoday times

Sarvoday Times

Latest News Portal & E-Paper

Primary Menu
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • राज्य
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • दिल्ली
    • बिहार
    • महाराष्ट्र
    • मध्य प्रदेश
    • चंडीगढ़
  • मनोरंजन
  • बिजनेस
  • खेल
  • क्राइम
  • गैजेट्स
  • जीवन शैली
  • E-Paper
  • Home
  • आज एकदंत संकष्टी चतुर्थी व्रत जाने इसकी कथा। ….
  • देश
  • धर्म
  • मेन स्लाइड

आज एकदंत संकष्टी चतुर्थी व्रत जाने इसकी कथा। ….

Sarvoday Times 5 years ago (Last updated: 5 years ago) 1 minute read 0 comments
02_12_2020-sankashti-chaturthi-2020_2020122_162343

आज एकदंत संकष्टी चतुर्थी व्रत है. भक्तों ने गणेश भगवान की प्रसन्न करने के लिए व्रत रखा है. सुबह जल्दी उठकर भक्तों ने पूजा-अर्चना की और व्रत का संकल्प लिया है. रात्रि में चंद्रमा के उदय होने के बाद दर्शन कर व्रत का पारण कर सकेंगे.

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत को करने वाले जातकों पर गणेश भगवान का आशीर्वाद बना रहता है और भगवान की कृपा से उनके बिगड़े हुए काम बनते हैं

और मार्ग में आने वाले संकट भी दूर हो जाते हैं. लॉकडाउन है इसलिए एकदंत संकष्टी चतुर्थी व्रत की पूजा घर पर ही करें. पूजा के बाद कथा का पाठ आवश्यक माना जाता है. आइए पढ़ते हैं एकदंत संकष्टी चतुर्थी व्रत की पावन कथा…

पौराणिक कथा के अनुसार, विष्णु भगवान का विवाह लक्ष्‍मीजी के साथ निश्चित हो गया. विवाह की तैयारी होने लगी. सभी देवताओं को निमंत्रण भेजे गए, परंतु गणेशजी को निमंत्रण नहीं दिया, कारण जो भी रहा हो.

अब भगवान विष्णु की बारात जाने का समय आ गया. सभी देवता अपनी पत्नियों के साथ विवाह समारोह में आए. उन सबने देखा कि गणेशजी कहीं दिखाई नहीं दे रहे हैं.

तब वे आपस में चर्चा करने लगे कि क्या गणेशजी को नहीं न्योता है? या स्वयं गणेशजी ही नहीं आए हैं? सभी को इस बात पर आश्चर्य होने लगा. तभी सबने विचार किया कि विष्णु भगवान से ही इसका कारण पूछा जाए.

विष्णु भगवान से पूछने पर उन्होंने कहा कि हमने गणेशजी के पिता भोलेनाथ महादेव को न्योता भेजा है. यदि गणेशजी अपने पिता के साथ आना चाहते तो आ जाते, अलग से न्योता देने की कोई आवश्यकता भी नहीं थीं.

दूसरी बात यह है कि उनको सवा मन मूंग, सवा मन चावल, सवा मन घी और सवा मन लड्डू का भोजन दिनभर में चाहिए. यदि गणेशजी नहीं आएंगे तो कोई बात नहीं. दूसरे के घर जाकर इतना सारा खाना-पीना अच्छा भी नहीं लगता.

इतनी वार्ता कर ही रहे थे कि किसी एक ने सुझाव दिया- यदि गणेशजी आ भी जाएं तो उनको द्वारपाल बनाकर बैठा देंगे कि आप घर की याद रखना. आप तो चूहे पर बैठकर धीरे-धीरे चलोगे तो बारात से बहुत पीछे रह जाओगे. यह सुझाव भी सबको पसंद आ गया, तो विष्णु भगवान ने भी अपनी सहमति दे दी.

होना क्या था कि इतने में गणेशजी वहां आ पहुंचे और उन्हें समझा-बुझाकर घर की रखवाली करने बैठा दिया. बारात चल दी, तब नारदजी ने देखा कि गणेशजी तो दरवाजे पर ही बैठे हुए हैं, तो वे गणेशजी के पास गए और रुकने का कारण पूछा.

गणेशजी कहने लगे कि विष्णु भगवान ने मेरा बहुत अपमान किया है. नारदजी ने कहा कि आप अपनी मूषक सेना को आगे भेज दें, तो वह रास्ता खोद देगी जिससे उनके वाहन धरती में धंस जाएंगे, तब आपको सम्मानपूर्वक बुलाना पड़ेगा.

अब तो गणेशजी ने अपनी मूषक सेना जल्दी से आगे भेज दी और सेना ने जमीन पोली कर दी. जब बारात वहां से निकली तो रथों के पहिए धरती में धंस गए. लाख कोशिश करें, परंतु पहिए नहीं निकले. सभी ने अपने-अपने उपाय किए, परंतु पहिए तो नहीं निकले, बल्कि जगह-जगह से टूट गए. किसी की समझ में नहीं आ रहा था कि अब क्या किया जाए.

तब तो नारदजी ने कहा- आप लोगों ने गणेशजी का अपमान करके अच्छा नहीं किया. यदि उन्हें मनाकर लाया जाए तो आपका कार्य सिद्ध हो सकता है और यह संकट टल सकता है.

शंकर भगवान ने अपने दूत नंदी को भेजा और वे गणेशजी को लेकर आए. गणेशजी का आदर-सम्मान के साथ पूजन किया, तब कहीं रथ के पहिए निकले. अब रथ के पहिए निकल को गए, परंतु वे टूट-फूट गए, तो उन्हें सुधारे कौन?

पास के खेत में खाती काम कर रहा था, उसे बुलाया गया. खाती अपना कार्य करने के पहले ‘श्री गणेशाय नम:’ कहकर गणेशजी की वंदना मन ही मन करने लगा. देखते ही देखते खाती ने सभी पहियों को ठीक कर दिया.

तब खाती कहने लगा कि हे देवताओं! आपने सर्वप्रथम गणेशजी को नहीं मनाया होगा और न ही उनकी पूजन की होगी इसीलिए तो आपके साथ यह संकट आया है. हम तो मूरख अज्ञानी हैं, फिर भी पहले गणेशजी को पूजते हैं

उनका ध्यान करते हैं आप लोग तो देवतागण हैं, फिर भी आप गणेशजी को कैसे भूल गए? अब आप लोग भगवान श्री गणेशजी की जय बोलकर जाएं, तो आपके सब काम बन जाएंगे और कोई संकट भी नहीं आएगा.

ऐसा कहते हुए बारात वहां से चल दी और विष्णु भगवान का लक्ष्मीजी के साथ विवाह संपन्न कराके सभी सकुशल घर लौट आए. हे गणेशजी महाराज! आपने विष्णु को जैसो कारज सारियो, ऐसो कारज सबको सिद्ध करजो. बोलो गजानन भगवान की जय.

Post navigation

Previous: 29 मई आज के पंचांग से जाने कैसी रहेगी ग्रहों की चाल। ….
Next: वजन कम करने में आपकी मदद करेगी पत्तागोभी जाने। …

Related Stories

IMG-20260921-WA0019-1068x713 (1)
  • उत्तर प्रदेश
  • जीवन शैली
  • मेन स्लाइड

मंगलवार को फिर 2500 युवाओं को मिलेंगे नियुक्ति पत्र: सीएम योगी

Sarvoday Times 1 month ago 0
aaajad-1200x900
  • उत्तर प्रदेश
  • दिल्ली
  • मेन स्लाइड

2027 में सपा को अपनी हार साफ दिख रही’… दानिश आजाद अंसारी का अखिलेश पर तीखा हमला

Sarvoday Times 1 month ago 0
images (2)33
  • उत्तर प्रदेश
  • दिल्ली
  • मेन स्लाइड

यूपी को फिर बांटने की कोशिश कर रहे समाजवादी: नितिन नवीन

Sarvoday Times 1 month ago 0
| ReviewNews by AF themes.