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भारत, मित्रता निभाना जानता है, तो, आंख-में-आंख डालकर देखना भी जानता है: PM मोदी

Sarvoday Times 6 years ago 1 minute read 0 comments
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प्रधानमंत्री ने कहा कि बिहार के रहने वाले शहीद कुंदन कुमार के पिताजी के शब्द तो कानों में गूंज रहे हैं. वो कह रहे थे, अपने पोतों को भी, देश की रक्षा के लिए, सेना में भेजूंगा. यही हौंसला हर शहीद के परिवार का है.

वास्तव में, इन परिजनों का त्याग पूजनीय है. भारत-माता की रक्षा के जिस संकल्प से हमारे जवानों ने बलिदान दिया है, उसी संकल्प को हमें भी जीवन का ध्येय बनाना है, हर देश-वासी को बनाना है.

हमारा हर प्रयास इसी दिशा में होना चाहिए, जिससे, सीमाओं की रक्षा के लिए देश की ताकत बढ़े, देश और अधिक सक्षम बने, देश आत्मनिर्भर बने – यही हमारे शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि भी होगी.

पीएम मोदी ने कहा कि लद्दाख में भारत की भूमि पर, आंख उठाकर देखने वालों को, करारा जवाब मिला है. भारत, मित्रता निभाना जानता है, तो, आंख-में-आंख डालकर देखना और उचित जवाब देना भी जानता है.

लद्दाख में हमारे जो वीर जवान शहीद हुए हैं, उनके शौर्य को पूरा देश नमन कर रहा है, श्रद्धांजलि दे रहा है. पूरा देश उनका कृतज्ञ है, उनके सामने नत-मस्तक है. इन साथियों के परिवारों की तरह ही, हर भारतीय, इन्हें खोने का दर्द भी अनुभव कर रहा है.

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने जिस तरह मुश्किल समय में दुनिया की मदद की, उसने आज शांति और विकास में भारत की भूमिका को और मज़बूत किया है. दुनिया ने भारत की विश्व बंधुत्व की भावना को भी महसूस किया है. अपनी संप्रभुता और सीमाओं की रक्षा करने के लिए भारत की ताकत और भारत के कमिटमेंट को देखा है.

पीएम मोदी ने कहा कि भारत में जहां एक तरफ़ बड़े-बड़े संकट आते गए, वहीं सभी बाधाओं को दूर करते हुए अनेकों-अनेक सृजन भी हुए. नए साहित्य रचे गए, नए अनुसंधान हुए, नए सिद्धांत गड़े गए, यानि संकट के दौरान भी हर क्षेत्र में सृजन की प्रक्रिया जारी रही और हमारी संस्कृति पुष्पित-पल्लवित होती रही. इसी साल में, देश नये लक्ष्य प्राप्त करेगा, नयी उड़ान भरेगा, नयी ऊंचाइयों को छुएगा। मुझे, पूरा विश्वास, 130 करोड़ देशवासियों की शक्ति पर है, आप सब पर है, इस देश की महान परम्परा है.

पीएम मोदी ने कहा कि भारत में जहां एक तरफ़ बड़े-बड़े संकट आते गए, वहीं सभी बाधाओं को दूर करते हुए अनेकों-अनेक सृजन भी हुए. नए साहित्य रचे गए, नए अनुसंधान हुए, नए सिद्धांत गड़े गए,यानि संकट के दौरान भी हर क्षेत्र में सृजन की प्रक्रिया जारी रही और हमारी संस्कृति पुष्पित-पल्लवित होती रही.

प्रधानमंत्री ने कहा कि एक साल में एक चुनौती आए या पचास, नंबर कम-ज्यादा होने से, वो साल, ख़राब नहीं हो जाता। भारत का इतिहास ही आपदाओं और चुनौतियों पर जीत हासिल कर, और ज़्यादा निखरकर निकलने का रहा है. सैकड़ों वर्षों तक अलग-अलग आक्रांताओं ने भारत पर हमला किया, लोगों को लगता था कि भारत की संरचना ही नष्ट हो जाएगी, लेकिन इन संकटों से भारत और भी भव्य होकर सामने आया.

मोदी ने कहा कि इन सबके बीच, हमारे कुछ पड़ोसियों द्वारा जो हो रहा है, देश उन चुनौतियों से भी निपट रहा है I वाकई, एक-साथ इनती आपदाएं, इस स्तर की आपदाएं, बहुत कम ही देखने-सुनने को मिलती हैं.

पीएम मोदी ने कहा कि अभी, कुछ दिन पहले, देश के पूर्वी छोर पर तूफान अम्फान आया, तो पश्चिमी छोर पर साइक्लोन निसर्ग आया. कितने ही राज्यों में हमारे किसान भाई–बहन टिड्डी दल के हमले से परेशान हैं और कुछ नहीं, तो देश के कई हिस्सों में छोटे-छोटे भूकंप रुकने का ही नाम नहीं ले रहे.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को ट्वीट कर कहा था कि रविवार को 11 बजे दिन मन की बात कार्यक्रम को सुनें. ये मन की बात कार्यक्रम का 66वां संस्करण है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हर महीने के आखिरी रविवार को मन की बात कार्यक्रम में देशवासियों के साथ संवाद करते हैं.

इससे पहले 14 जून को पीएम मोदी ने देशवासियों से ‘मन की बात’कार्यक्रम के लिए सुझाव और विचार मांगे थे. पीएम ने ट्वीट कर कहा था कि ज्यादा से ज्यादा लोग अपने विचारों को शेयर करें. पीएम ने कहा था कि मैं निश्चित रूप से कह सकता हूं कि आपके पास कोविड-19 से लड़ाई और कई दूसरे मुद्दों पर कहने के लिए बहुत कुछ होगा.

जब पीएम ने 14 जून को मन की बात कार्यक्रम के लिए लोगों से सुझाव मांगे थे तब तक गलवान में चीनी धोखे की घटना सामने नहीं आई थी. 15 जून की रात को गलवान में भारतीय सेना की चीनी सैनिकों से भिड़ंत हुई थी. माना जा रहा है कि पीएम मोदी अपने संवाद में गलवान में भारतीय सैनिकों के पराक्रम का जिक्र कर सकते हैं.

पिछले दो मन की बात कार्यक्रम में नरेंद्र मोदी देशवासियों से कोरोना संक्रमण पर बात कर चुके हैं. 31 मई को हुए मन की बात कार्यक्रम में पीएम ने लोगों से अपनी सुरक्षा का ध्यान रखने और एहतियात बरतने को कहा था.

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