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उत्तराखंड: मैदानी इलाकों में छाया घना कोहरा, वाहन चालकों को रही परेशानी, फसलों को नुकसान

Sarvoday Times 6 years ago 1 minute read 0 comments
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उत्तराखंड में इनदिनों भले ही मौसम साफ हो, लेकिन कोहरा मुसीबत बना हुआ है। खासकर मैदानी इलाकों में। राजधानी देहारदून में सुबह से ही घना कोहरा छाया हुआ है, जिससे ठिठुरन बढ़ने लगी है। आलम ये है कि सड़क पर चल रहे वाहनों को दिखने में परेशानी हो रही है। वाहन चालक लाइट ऑन कर आगे बढ़ रहे हैं। हालांकि, कुछ पहाड़ी जिलों में सुबह से ही धूप खिलने से लोगों को राहत पहुंची है।
प्रदेश में पिछले कुछ दिनों से मौसम शुष्क बना हुआ है। मंगलवार को गणतंत्र दिवस पर भी मौसफ साफ रहा, हालांकि सुबह और शाम के वक्त कोहरा छाया रहा। मौसम विभाग के मुताबिक पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने के बाद बीते शुक्रवार को इसके उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्र में पहुंचने की संभावना थी, लेकिन अरब सागर से उठने वाले साइक्लोनिक सर्कुलेशन के कारण पश्चिमी विक्षोभ जम्मू-कश्मीर और पाकिस्तान की ओर पहुंच गया। ऐसे में उत्तराखंड में उम्मीद के अनुरूप बारिश और बर्फबारी नहीं हो सकी। फिलहाल, यहां मौसम साफ बना रह सकता है। पहाड़ों में कहीं-कहीं आंशिक बादल छाये रह सकते हैं। वहीं, तापमान में भी मामूली गिरावट आने के आसार हैं। कोहरे के कारण झुलस रहे टमाटर के पौधे पछवादून में रोजाना कोहरे का प्रभाव दिखाई दे रहा है, जिससे फसलें विशेषकर सब्जी पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। आजकल पछवा दून क्षेत्र में टमाटर के पौधे झुलस रहे हैं, पत्तियां मुड़ने लगी हैं। कृषि विज्ञान केंद्र ढकरानी के वैज्ञानिक डॉ संजय कुमार का कहना है कि फसलों पर कोहरे का प्रभाव महसूस किया जा सकता है। रबी की फसलों में मुख्यतः आलू सरसों और अन्य सब्जी वाली फसलों टमाटर आदि में कोहरे से काफी नुकसान होने की आशंका बनी रहती है। जैसे अधिक नमी के कारण झुलसा रोग की समस्या और तापमान गिरने के कारण पौधों में सीलिंग इंजरी यानी के ठंड से घाव बनना जैसी समस्याएं होने लगती हैं। दरअसल, पौधे प्रकाश संश्लेषण की क्रिया की कमी होने और सीलिंग इंजरी के कारण पुष्पक्रम की चमक धीमी पड़ जाती है और पुष्प उत्पादन घट जाता है। गेहूं की फसल में यदि कई दिनों तक अधिक और घना कोहरा छाया रहे तो प्रकाश संश्लेषण की क्रिया बाधित होने के कारण बढ़वार बहुत धीमी गति से होती है। इसी प्रकार का प्रभाव गन्ने की फसल में भी देखा जा सकता है। चारा फसलों में भी कोहरे का प्रभाव साफ तौर पर दिखाई पड़ता है। कोहरे के कारण चारा फसलों में पौधों की पत्तियां  बैंगनी रंग की हो रही हैं।

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