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गोबरधन योजना से गांवों में स्वच्छता और आय बढ़ी, पंचायतों ने 28 लाख रुपये से अधिक की कमाई की

Sarvoday Times 6 months ago (Last updated: 6 months ago) 1 minute read 0 comments
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लखनऊ उत्तर प्रदेश में गोबरधन योजना के माध्यम से ग्राम पंचायतें स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक सशक्तिकरण का एक प्रभावी मॉडल प्रस्तुत कर रही हैं। गोबर और जैविक कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन के जरिए गांवों में स्वच्छ वातावरण सुनिश्चित किया जा रहा है। साथ ही इस पहल के माध्यम से ऊर्जा और जैविक खाद का उत्पादन कर पंचायतों की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की जा रही है। फरवरी 2026 तक ग्राम पंचायतों ने जैविक खाद और अन्य उत्पादों की बिक्री से 28 लाख रुपये से अधिक की आय अर्जित की है, जिससे पंचायतों की स्वयं की आय में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।
प्रदेश में स्थापित बायोगैस संयंत्रों से तैयार उत्पादों की बिक्री पंचायतों के लिए आय का महत्वपूर्ण स्रोत बन रही है। आय के मामले में ललितपुर जिला सबसे आगे है, जहां ग्राम पंचायतों ने गोबरधन योजना के माध्यम से 3,37,990 रुपये की स्वयं की आय अर्जित की है। इसके बाद श्रावस्ती जिले में 2,87,036 रुपये तथा रामपुर जिले में 1,23,400 रुपये की आय दर्ज की गई है। यह उपलब्धि दर्शाती है कि योजना के माध्यम से पंचायतों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हो रही है और ग्रामीण विकास को नई गति मिल रही है।प्रदेश के विभिन्न जनपदों में स्थापित बायोगैस संयंत्रों के माध्यम से गोबर, रसोई कचरे और कृषि अवशेषों को संसाधित कर स्वच्छ ऊर्जा और जैविक खाद तैयार की जा रही है। इस ऊर्जा का उपयोग गांवों में स्थानीय स्तर पर विभिन्न सुविधाओं के संचालन में किया जा रहा है। रामपुर जिले में बायोगैस ऊर्जा से तेल पिराई मशीन संचालित की जा रही है, जबकि आगरा, ललितपुर, श्रावस्ती, बुलंदशहर, बांदा, सोनभद्र और हरदोई जिलों में बायोगैस ऊर्जा से आटा चक्कियों का संचालन हो रहा है। इससे ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर सुविधाएं मिल रही हैं और पंचायतों को नियमित आय का स्रोत प्राप्त हो रहा है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ रोजगार के अवसर भी सृजित हो रहे हैं।पंचायती राज विभाग द्वारा प्रदेश के 74 जनपदों में कुल 116 बायोगैस संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं। इनमें से कई संयंत्र गौशालाओं में स्थापित किए गए हैं, जहां गोबर और अन्य जैविक कचरे का उपयोग कर स्वच्छ ईंधन और जैविक खाद तैयार की जा रही है। यह पहल कचरे के बेहतर प्रबंधन के साथ-साथ ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोत उपलब्ध कराने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।गोबरधन योजना के माध्यम से प्रदेश के गांवों में स्वच्छता के साथ-साथ आर्थिक समृद्धि की दिशा में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। इस योजना के अंतर्गत तैयार जैविक खाद का उपयोग किसान जैविक खेती में कर रहे हैं, जिससे खेती की लागत कम होने के साथ भूमि की उर्वरता में सुधार हो रहा है। वहीं स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग से ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिल रहा है।पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि प्रदेश सरकार गांवों को स्वच्छ, आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। गोबरधन योजना के माध्यम से कचरे के बेहतर प्रबंधन के साथ स्वच्छ ऊर्जा और जैविक खेती को बढ़ावा मिल रहा है। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ ग्राम पंचायतों की आय बढ़ने से स्थानीय विकास कार्यों को भी गति मिल रही है।निदेशक पंचायती राज विभाग अमित कुमार सिंह ने कहा कि गोबरधन योजना ग्रामीण क्षेत्रों में संसाधनों के बेहतर उपयोग और स्वच्छता को बढ़ावा देने का एक प्रभावी मॉडल बनकर उभर रही है। उन्होंने बताया कि पंचायतों द्वारा जैविक खाद और अन्य उत्पादों की बिक्री से स्वयं की आय में निरंतर वृद्धि हो रही है, जो ग्रामीण विकास के लिए सकारात्मक संकेत है।

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