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पीडीए पूरी तरह ढकोसला, दलित महापुरुषों से चिढ़ते हैं अखिलेश: ओम प्रकाश राजभर

Sarvoday Times 3 hours ago (Last updated: 3 hours ago) 1 minute read 0 comments
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सुभासपा प्रमुख बोले- कभी पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक तो कभी पंडित-दलित-अहीर बताते हैं पीडीए का मतलब

कहा- सपा सरकार में सबसे ज्यादा तोड़ी गईं बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमाएं

गेस्ट हाउस कांड का किया जिक्र, बोले- मायावती की हत्या करना चाहते थे सपाई गुंडे

नीले गमछे पर कसा तंज, कहा- सिर पर लाल टोपी और गले में नीला गमछा याद दिलाता है दो जून 1995 की घटना

राजभर का आरोप- अखिलेश सरकार में दलितों पर कई गुना बढ़ा अत्याचार, प्रमोशन में आरक्षण भी किया खत्म

कहा- योगी सरकार में दलित महापुरुषों को मिल रहा सम्मान, पार्कों के सौंदर्यीकरण के लिए दिए गए 500 करोड़ रुपये

20 सितंबर, लखनऊ। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष एवं प्रदेश सरकार के पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने रविवार को समाजवादी पार्टी के पीडीए नारे को लेकर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला। उन्होंने पीडीए को पूरी तरह ढकोसला बताते हुए कहा कि अखिलेश इसका मतलब अपनी सुविधा के अनुसार बदलते रहते हैं। कभी पीडीए को पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक बताते हैं तो कभी पी से पंडित, डी से दलित और ए से अहीर कहते हैं। कभी ए से अल्पसंख्यक, आधी आबादी तो कभी अगड़ा बता देते हैं।

राजभर ने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव दलितों से नफरत करते हैं और दलित महापुरुषों की प्रतिमा देखकर उनकी चिढ़ और बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि 2012 से 2017 की सपा सरकार के दौरान बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमाएं सबसे ज्यादा तोड़ी गईं। जौनपुर, मऊ, सीतापुर और आजमगढ़ समेत कई जिलों में ऐसी घटनाएं हुईं। उन्होंने कहा कि आंकड़े उठाकर देख लिए जाएं तो अखिलेश सरकार के दौरान दलितों पर अत्याचार कई गुना बढ़ा था।

आगरा में दलित ग्राम प्रधान की हत्या का किया जिक्र
ओम प्रकाश राजभर ने आगरा की एक घटना का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि सपा सरकार में एक दलित ग्राम प्रधान को सपाइयों ने पीट-पीटकर मार डाला था। ग्राम प्रधान का कसूर केवल इतना था कि उन्होंने सपा को वोट नहीं दिया था। उन्होंने कहा कि सपा सरकार के समय बाबा साहब की प्रतिमाएं तोड़ने से लेकर दलितों पर अत्याचार तक के मामले लगातार सामने आए।

राजभर ने कहा कि आज भी यूपी में दलितों पर अत्याचार के मामले में यादव और मुस्लिम यानी सपा के वोटर ही सबसे आगे हैं। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव और उनके सैफई के कुनबे की बसपा सुप्रीमो मायावती को लेकर क्या सोच है, यह किसी से छिपी नहीं है।

गेस्ट हाउस कांड को लेकर सपा को घेरा
राजभर ने दो जून 1995 के गेस्ट हाउस कांड का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि उस समय सपाई गुंडे मायावती की हत्या करना चाहते थे। संयोग से वहां भाजपा के नेता पहुंच गए। भाजपा के लोग नहीं होते तो शायद मायावती की हत्या कर दी जाती। किसी तरह उनकी जान बची थी।

उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव आज दलित सम्मान की बात कर रहे हैं, लेकिन उनके शासनकाल में दलित बेटियों के साथ जितना जुर्म हुआ, उसे कौन नहीं जानता। अब वक्त बदल चुका है। योगी सरकार में दलित महापुरुषों को सम्मान मिल रहा है और दलित नायकों को नई पहचान दी जा रही है।

नीला गमछा अखिलेश के गले की फांस: राजभर
अखिलेश यादव के नीले गमछे पर तंज कसते हुए ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि वह बाबा साहब डॉ. आंबेडकर को आगे करके वोट लेने की सोच रहे हैं, लेकिन यही नीला गमछा उनके गले की फांस है। सिर पर लाल टोपी और गले में नीला गमछा दो जून 1995 की घटना की याद दिलाता है कि गेस्ट हाउस कांड में सपा ने मायावती के साथ क्या किया था।

राजभर ने कहा कि अखिलेश यादव ने प्रमोशन में आरक्षण खत्म किया। दलित महापुरुषों और बाबा साहब के नाम पर बने पार्कों और जिलों को खत्म करने का काम किया। दलितों के उत्थान और विकास के लिए महापुरुषों के नाम से बनी योजनाओं को भी खत्म किया गया।

महापुरुषों से जुड़े पार्कों के लिए 500 करोड़
ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि योगी सरकार में सभी महापुरुषों का सम्मान सुरक्षित है। दलित महापुरुषों को सम्मान देने के साथ दलित नायकों को नई पहचान मिल रही है। महापुरुषों के नाम पर बने पार्कों में पुरानी हो चुकी प्रतिमाओं को बदलने, बाउंड्री कराने और सौंदर्यीकरण के अन्य कार्यों के लिए सरकार ने 500 करोड़ रुपये दिए हैं और सभी जगह काम शुरू हो गया है।

उन्होंने कहा कि महापुरुषों को लेकर आज की सरकार जिस सोच के साथ काम कर रही है, ऐसी सोच सत्ता में रहते हुए अखिलेश यादव के मन में पैदा हुई होती तो शायद कुछ कदम आगे बढ़े होते। राजभर ने कहा कि अखिलेश जिस सोच को लेकर चल रहे हैं, उस पर 2027 में एक बार फिर पानी फिर जाएगा।

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