JPNIC, गोमती रिवर फ्रंट से खनन तक… अखिलेश के आरोपों पर अनिल राजभर ने गिनाए सपा राज के मामले
‘पहले अपने कार्यकाल का हिसाब दें अखिलेश’… भ्रष्टाचार के आरोपों पर अनिल राजभर का करारा जवाब
‘भ्रष्टाचार पर बोलने से पहले अपना गिरेबान देखें’… अखिलेश पर अनिल राजभर का तीखा हमला
लखनऊ, 21 सितंबर। उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री अनिल राजभर ने समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव पर तीखा पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि सरकार पर आरोप लगाने से पहले समाजवादी पार्टी को अपने कार्यकाल के कामकाज का हिसाब देना चाहिए। अनिल राजभर ने अखिलेश यादव पर तंज कसते हुए कहा कि हल्का आदमी ही अखिलेश यादव की तरह रोज-रोज बयानबाजी करता है। इसीलिए सपा प्रमुख की उपयोगिता खत्म हो गई है।
‘सपा भ्रष्टाचार की बात करे, यह अजूबा है’
अनिल राजभर ने कहा कि समाजवादी पार्टी का भ्रष्टाचार की बात करना ही अपने आप में अजूबा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा नेता लगातार सरकार को लेकर जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। मंत्री ने कहा कि जनता राजनीतिक दलों के दावों के साथ-साथ सपा के पुराने रिकॉर्ड को भी समझती है।
उन्होंने कहा कि अगर समाजवादी पार्टी मौजूदा सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगा रही है, तो उसे अपने शासनकाल से जुड़े सवालों का भी जवाब देना चाहिए। अनिल राजभर ने इसी सिलसिले में JPNIC, गोमती रिवर फ्रंट, आगरा एक्सप्रेसवे, सरकारी नौकरियों और खनन जैसे मामलों का जिक्र किया।
JPNIC से खनन तक के मुद्दे पर सपा को घेरा
मंत्री ने कहा कि सपा राज में JPNIC और गोमती रिवर फ्रंट समेत कई परियोजनाओं को लेकर सवाल उठे थे। उन्होंने खनन को लेकर भी सपा सरकार पर निशाना साधते हुए अनियमितताओं के आरोप लगाए। अनिल राजभर ने यह भी कहा कि पिछली सरकार के दौरान खनन से जुड़े मामलों में मंत्रियों को जेल जाना पड़ा। उन्होंने इन मामलों का जिक्र करते हुए समाजवादी पार्टी से जवाब मांगा। मंत्री ने कहा कि विपक्ष को मौजूदा सरकार से सवाल पूछने का अधिकार है, लेकिन उसे अपने कार्यकाल से जुड़े सवालों का भी जवाब देना चाहिए।
‘अखिलेश को सच्चाई सुनने की हिम्मत रखनी चाहिए’
मीडिया के सवालों को लेकर भी अनिल राजभर ने अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि जब पत्रकार सपा सरकार के कार्यकाल या उत्तर प्रदेश के विकास से जुड़े सवाल पूछते हैं, तो पार्टी के नेता असहज हो जाते हैं।
उन्होंने कहा कि पत्रकारों के सवाल लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और राजनीतिक दलों को कठिन सवालों का भी जवाब देने की हिम्मत रखनी चाहिए। अनिल राजभर ने आरोप लगाया कि सपा नेता मीडिया के सवालों का जवाब देने के बजाय पत्रकारों को ही निशाना बनाने लगते हैं।