April 15, 2021

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अशोक गहलोत सचिन पायलट की आंधी को खत्म करने की तैयारी में जुटे

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राजस्थान की सियासत में इन दिनों हर रोज़ नया सस्पेंस और ड्रामा देखने को मिल रहा है. जब से अशोक गहलोत ने ये दावा किया है कि उनकी सरकार को गिराने के लिए साजिश रची गई है

कांग्रेस के बड़े नेताओं ने जयपुर में डेरा डाल दिया. इन सबका कहना है कि वो एक मिशन पर हैं. एक ऐसा मिशन जिसके दो लक्ष्य हैं- पहला कांग्रेस को संकट के दौर से निकालना और दूसरा बीजेपी और सचिन पायलट के समर्थकों को करारा जवाब देना.

पायलट को घेरने को तैयारी

सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस के नेताओं की नज़र पायलट के खेमे पर भी टिकीं है. वो रिज़ॉट में ठहरे विधायकों से ये जानने की कोशिश कर रहे हैं कि उनका अगला कदम क्या होगा.

इतना ही नहीं कांग्रेस अपने बागी विधायकों और सचिन पायलट को संवैधानिक मोर्चे पर भी जवाब देने की योजना बना रहे हैं.

लिहाज़ा सीएम अशोक गहलोत ने शनिवार को अचानक राज्यपाल कलराज मिश्र से मुलाकात कर हर किसी को हैरान कर दिया.

सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने भारतीय ट्रायबल पार्टी के दो विधायकों के समर्थन पत्र राज्यपाल को दिए हैं. बता दें कि इन दोनों विधायकों ने कांग्रेस से समर्थन वापस ले लिया था, लेकिन अब एक बार फिर से ये दोनों कांग्रेस के खेमे में आ गए हैं.

क्या है आंकड़ों का खेल

सूत्रों के मुताबिक, गहलोत ने बुधवार को विधानसाभा का सत्र बुलाने की सोच रहे हैं . इस विशेष सत्र में वो अपना बहुमत सिद्ध कर सकते हैं. सीएम अशोक गहलोत का दावा है

कि उन्हें 103 विधायकों का समर्थन हासिल है. कहा जा रहा है कि इसमें कांग्रेस के 88, बीटीपी के 02, सीपीएम 02, आरएलडी के 1 और 10 निर्दलीय विधायक शामिल हैं.

सवाल उठता है कि आखिर गहलोत क्यों बहुमत सिद्ध करने में क्यों जल्दबाज़ी में हैं…

1-सूत्रों की मानें तो बहुमत साबित कर गहलोत ये दिखाना चाहते हैं कि विधायकों पर उनकी मजबूत पकड़ है.
2-इसके अलावा वोटिंग के जरिए उन विधायकों को भी वो अपने खेमे में शामिल कर सकते हैं जो इस बात को लेकर पूरी तरह साफ नहीं है कि उन्हें किस खेमे में जाना है.
3-सूत्रों का कहना है कि विधानसभा सत्र बुलाने से बागी विधायक भी फ्लोर टेस्ट में भाग ले सकते हैं. स्पीकर सीपी जोशी का कहना है कि उन्हें 18 विधायकों को डिसक्वालीफाई करने का अधिकार है. अगर ऐसा होता है तो फिर गहलोत को फ्लोर टेस्ट में कोई नहीं हरा सकता.
4-गहलोत ने विधानसभा सत्र बुलाकर हाई कोर्ट पर भी जल्दी फैसला सुनाने का दबाव बना दिया है. बता दें कि पायलट और कांग्रेस के 18 अन्य विधायकों को अयोग्य घोषित किए जाने को लेकर विधानसभा अध्यक्ष की ओर से नोटिस जारी किया गया है. इसी नोटिस के खिलाफ पायलट गुट हाई कोर्ट पहुंचे हैं.

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