June 22, 2021

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MISSION CHANDRAYAAN-2: कल दोपहर 2 बजकर 43 मिनट पर होगी लॉन्चिंग

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मिशन चंद्रयान-2

भारत का चांद पर दूसरा महत्वाकांक्षी मिशन चंद्रयान-2 सोमवार दोपहर दो बजकर 43 मिनट पर रवाना होगा। इसरो ने ट्वीट करके जानकारी दी है कि लॉन्च की रिहर्सल पूरी हो चुकी है और इसका प्रदर्शन समान्य है। जीएसएलवी-एमके-थ्री एम1 रॉकेट में कुछ तकनीकी दिक्कत के चलते 15 जुलाई को चंद्रयान-2 का प्रक्षेपण रोक दिया गया था। इसरो ने बताया कि विशेषज्ञ समिति ने तकनीकी खामी की मुख्य वजह का पता लगा लिया और उसके बाद सही कदम उठाए गए हैं। अब इस 3,850 किलोग्राम वजनी ‘चंद्रयान-2 का प्रक्षेपण श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से 22 जुलाई 2019 को अपराह्न दो बजकर 43 मिनट पर होगा। यह अपने साथ एक ऑर्बिटर, एक लैंडर और एक रोवर ले जाएगा और चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरेगा।

54 दिन में चांद पर पहुंचेगा
पहले चंद्र मिशन की सफलता के 11 साल बाद भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) भू-समकालिक प्रक्षेपण यान जीएसएलवी-एमके तृतीय से 978 करोड़ रुपये की लागत से बने ‘चंद्रयान-2 का प्रक्षेपण करेगा। इसे चांद तक पहुंचने में 54 दिन लगेंगे।

चंद्रयान 2 में कुल 13 पेलोड

देशी तकनीक से निर्मित चंद्रयान-2 में कुल 13 पेलोड हैं। आठ ऑर्बिटर में, तीन पेलोड लैंडर विक्रम और दो पेलोड रोवर प्रज्ञान में हैं। पांच पेलोड भारत के, तीन यूरोप, दो अमेरिका और एक बुल्गारिया के हैं। लैंडर विक्रम का नाम भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान कार्यक्रम के जनक डॉक्टर विक्रम ए साराभाई के नाम पर रखा गया है। दूसरी ओर, 27 किलोग्राम प्रज्ञान का मतलब संस्कृत में बुद्धिमता है।

राष्ट्रपति श्रीहरिकोटा में प्रक्षेपण देखेंगे
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद श्रीहरिकोटा में चंद्रयान का प्रक्षेपण होते हुए देखेंगे। वे एक दिन पहले ही श्रीहरिकोटा पहुंच गए हैं। प्रक्षेपण के करीब 16 मिनट बाद जीएसएलवी-एमके तृतीय चंद्रयान-2 को पृथ्वी की कक्षा में स्थापित करेगा।

चंद्रमा का गहराई से अध्ययन करेगा
मिशन के मुख्य उद्देश्यों में चंद्रमा पर पानी की मात्रा का अनुमान लगाना, उसके जमीन, उसमें मौजूद खनिजों एवं रसायनों तथा उनके वितरण का अध्ययन करना, उसकी भूकंपीय गतिविधियों का अध्ययन, और चंद्रमा के बाहरी वातावरण की ताप-भौतिकी गुणों का विश्लेषण है। मिशन में तरह-तरह के कैमरा, स्पेक्ट्रोमीटर, रडार, प्रोब और सिस्मोमीटर भेजे जा रहे हैं। चंद्रमा पर भारत के पहले मिशन चंद्रयान-1 ने वहां पानी की मौजूदगी की पुष्टि की थी।

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