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कान्स फिल्म फेस्टिवल में छाई बॉम्बे स्टोरीज, सेक्स वर्कर के किरदार पर खुलकर बोलीं अनुप्रिया गोयनका।

Sarvoday Times 4 months ago 1 minute read 0 comments
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अभिनेत्री अनुप्रिया गोयनका इन दिनों अपनी आने वाली फिल्म बॉम्बे स्टोरीज को लेकर लगातार चर्चा में बनी हुई हैं। यह फिल्म कान्स फिल्म फेस्टिवल में दिखाई जा रही है। किसी भी कलाकार के लिए कान्स तक पहुंचना एक बड़ी उपलब्धि है और अनुप्रिया के लिए भी यह मौका बेहद खास है, क्योंकि यह उनकी पहली इंडिपेंडेंट फिल्म है। फिल्म का निर्देशन राहत शाह काजमी ने किया है और इसकी कहानी मशहूर लेखक सआदत हसन मंटो की चर्चित कहानी हतक से प्रेरित है। फिल्म में समाज के उस हिस्से की कहानी दिखाई गई है, जिसके बारे में अक्सर लोग खुलकर बात नहीं करते। फिल्म बॉम्बे स्टोरीज में अनुप्रिया गोयनका एक सेक्स वर्कर के किरदार में हैं। उनके साथ फिल्म में मौनी रॉय और सुष्मिता सिंह भी अहम भूमिकाएं निभा रही हैं। फिल्म में सेक्स वर्कर्स की जिंदगी, उनके संघर्ष, समाज के नजरिए और उनके भीतर छिपी भावनाओं को दिखाने की कोशिश की गई है।
अपने किरदार के बारे में बात करते हुए अनुप्रिया ने कहा, मैं लंबे समय से इंडिपेंडेंट सिनेमा का हिस्सा बनना चाहती थीं। मुझे इस बात की बेहद खुशी है कि मेरी पहली फिल्म मंटो की कहानी पर आधारित है। हतक शब्द का मतलब अपमान होता है और फिल्म की कहानी भी इसी भावना के इर्द-गिर्द घूमती है। मेरा किरदार सौगंधी समाज की नजरों और लोगों के फैसलों के बीच खुद को समझने की कोशिश करती है।
अभिनेत्री ने अपने किरदार को समझाते हुए कहा, सौगंधी एक ऐसी महिला है, जिसने अपनी जिंदगी को उसी रूप में स्वीकार कर लिया है, लेकिन उसके दिल में भी प्यार और सम्मान पाने की चाहत है। वह चाहती है कि कोई उसे सिर्फ शरीर की नजर से न देखे, बल्कि उसे एक इंसान और एक महिला के रूप में महसूस करे। इस किरदार में मुझे खुद की कई भावनाएं नजर आईं। मैंने इस किरदार को निभाते हुए एक महिला के कई अलग-अलग पहलुओं को समझा और महसूस किया।
अनुप्रिया गोयनका ने सेक्स वर्क को लेकर कहा, अगर कोई व्यक्ति अपनी इच्छा से यह काम चुनता है, तो यह उसका अधिकार और उसका फैसला है। इसे किसी दूसरे पेशे की तरह ही देखा जाना चाहिए। लेकिन जब किसी महिला को मजबूरी में इस काम में धकेला जाता है, उसके अधिकार छीन लिए जाते हैं या उसे इंसान की तरह सम्मान नहीं मिलता, तब यह गलत और दुखद बन जाता है।
उन्होंने कहा, समाज में सेक्स वर्कर्स को अक्सर सिर्फ एक वस्तु की तरह देखा जाता है, जबकि उनके भी सपने, भावनाएं हैं और उन्हें भी सम्मान की जरूरत होती है। जब तक किसी को उसकी इच्छा के खिलाफ इस काम में मजबूर नहीं किया जाता, तब तक समाज को उसे जज करने का अधिकार नहीं होना चाहिए।

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