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मुख्यमंत्री भगवान ऋषभदेव दिगम्बर जैन मन्दिर, अयोध्या में आयोजित भगवान मुनिसुव्रतनाथ पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में सम्मिलित हुए

Sarvoday Times 3 months ago (Last updated: 3 months ago) 1 minute read 0 comments
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लखनऊ :  उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने कहा कि जैन तीर्थंकरों ने अपनी साधना और पवित्र वाणी के माध्यम से विश्व मानवता को सदैव प्रेरणा दी है। आदिनाथ भगवान ऋषभदेव जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर है। अयोध्या आदिनाथ भगवान ऋषभदेव की पावन धरा है। पहले अयोध्या के राजा पूरी दुनिया के राजा होते थे। भगवान ऋषभदेव इस धरती के पहले राजा हैं। उनके पुत्र भगवान भरत के नाम पर देश का नाम भारत पड़ा।
मुख्यमंत्री जी आज भगवान ऋषभदेव दिगम्बर जैन मन्दिर, अयोध्या में आयोजित भगवान मुनिसुव्रतनाथ पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने विश्व में प्रथम बार निर्मित श्री दिगम्बर जैन मंदिर 101 भगवान का लोकार्पण किया।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि उत्तर प्रदेश का सौभाग्य है कि 24 जैन तीर्थंकरों में से सर्वाधिक जैन तीर्थंकर प्रदेश की धरती पर हुए। उनमें से 05 तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव, भगवान अजितनाथ, भगवान अभिनन्दननाथ, भगवान सुमतिनाथ और भगवान अनन्तनाथ का जन्म अयोध्या में हुआ। काशी में 04 तीर्थंकर तथा श्रावस्ती में 01 तीर्थंकर हुए। इसी प्रकार हस्तिनापुर में जैन मन्दिरों की लम्बी परम्परा है। कुशीनगर में 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर ने अपना अन्तिम उपदेश देकर उसे पावानगरी अर्थात पवित्रनगरी के रूप में आशीर्वाद दिया था। बीच के कालखण्ड में उसका नाम फाजिलनगर कर दिया गया था। हाल ही में फाजिलनगर का नाम पुनः पावागढ़ किया गया।
मुख्यमंत्री जी ने रामायण के एक प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि जब भगवान श्रीराम ने बालि को मारा, तो बालि उनसे पूछता है कि आपने मुझे धोखे से क्यों मारा और आपका मेरे राज्य पर क्या अधिकार था। भगवान श्रीराम ने बालि से कहा कि तुम्हारा कर्म ही तुम्हारी अधोगति का कारण है। सागरों, वनों से आच्छादित धरा जहां कहीं भी है, वह अयोध्या के राजाओं की धरती है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि जैन परम्परा बहुत पवित्र परम्परा है। उन्होंने धरती के राजा के रूप मेंं सबका लालन-पालन एवं सरंक्षण करते हुए ‘जियो और जीने दो’ की प्रेरणा दी। ‘जियो और जीने दो’ का मंत्र वही दे सकता है, जो आत्मानुशासन से बंधा तथा सुरक्षित हो। नकारात्मक एवं उच्श्रृंखल ताकतें आत्मानुशासन में नहीं रह सकती हैं। जिसका स्वयं पर अनुशासन नहीं है, वह दूसरों पर शासन नहीं कर सकता। इस पवित्र परम्परा ने हमें यही प्रेरणा दी है। यह संदेश पूरी दुनिया के लिए है। इस संदेश पर चलकर हम पूरी दुनिया के मनुष्य एवं जीव मात्र के कल्याण का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं। यही मार्ग सबके कल्याण का मार्ग हो सकता है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि अयोध्या की धरती का गौरवशाली इतिहास रहा है। अयोध्या के राजाओं की परम्परा रही है कि वह भारत के ज्ञान की परम्परा तथा गौमाता की रक्षा करते रहे हैं। उन्होंने श्रद्धालुजन से अनुरोध करते हुए कहा कि यदि हम गौरक्षा के लिए कुछ कर सकते हैं, तो हमें जरूर करना चाहिए। यह हमारे संस्कार हैं कि भारत में प्रत्येक परिवार के खानपान का पहला ग्रास गौमाता तथा अंतिम ग्रास श्वान के लिए होता है। इसी प्रकार जब हम शाम को घर में दीपक जलाते हैं, तो चीटियों को आटा और चीनी देते हैं। जीव मात्र के कल्याण के लिए ‘जियो और जीने दो’ की भी यही प्रेरणा है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि गाय एक दैवीय विभूति है। हमें गाय की रक्षा, संरक्षण एवं संवर्धन करना चाहिए। यदि सम्भव हो, तो एक गौशाला गोद लें। यदि पूरी गौशाला गोद नहीं ले सकते, तो कुछ गायों को गोद लेकर वार्षिक रूप से सहयोग करें। वर्षपर्यन्त कम से कम एक गाय का खर्च अवश्य उठाएं। गौशालाओं में रहने वाली गायों के स्वास्थ्य की देखभाल करें। यदि गौमाता स्वस्थ रहेगी, तो भारत की संस्कृति स्वस्थ रहेगी। वैदिक सनातन धर्म सुरक्षित रहेगा, तो जैन धर्म भी सुरक्षित रहेगा। यह दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं। एक की सुरक्षा दूसरे की सुरक्षा में निहित है। यह दोनों धाराएं अलग नहीं हैं।
परम्परा एक है, लेकिन मंजिल तक पहुंचने के रास्ते अलग-अलग हो सकते हैं। इस परम्परा को हमें अपने जीवन का हिस्सा बनाना होगा। तीर्थों की पवित्रता को बनाए रखने के लिए स्वच्छता अभियान का हिस्सा बनना होगा। वृक्षारोपण एवं पर्यावरण संरक्षण अभियान को प्राथमिकता देनी होगी। साथ ही, देश में चल रहे प्रत्येक उस अभियान का हिस्सा बनना होगा, जिसका भारत की सुरक्षा एवं सम्प्रभुता को बनाए रखने में योगदान है। इसके दृष्टिगत प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने कहा है कि प्रत्येक नागरिक को देश तथा समाज के प्रति अपने नागरिक कर्तव्यों का बोध होना चाहिए। यदि हम अपने कर्तव्यों का ईमानदारीपूर्वक पालन करेंगे, तो भारत और भारतीयता को जीवित बनाने में सफल होंगे।  
मुख्यमंत्री जी ने सर्वोच्च जैन साध्वी पूज्य गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी के स्वस्थ एवं दीर्घ जीवन की कामना की। भगवान मुनिसुव्रतनाथ पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के प्रति अपनी शुभेच्छा व्यक्त की। उन्होंने विश्वास किया कि सभी श्रद्धालुगण इस पवित्र परम्परा को जीवन्त बनाए रखते हुए समाज को सद्वृत्ति की ओर अग्रसर करने में सहायक होंगे।
कार्यक्रम को सर्वोच्च जैन साध्वी पूज्य गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी तथा स्वस्ति श्री रवीन्द्रकीर्ति स्वामी ने भी सम्बोधित किया।
इस अवसर पर कृषि मंत्री श्री सूर्य प्रताप शाही सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण तथा श्रद्धालुजन उपस्थित थे।

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