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दया याचिका के निपटारे के लिए जारी हुई गाइडलाइन

Sarvoday Times 2 years ago (Last updated: 2 years ago) 1 minute read 0 comments
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 उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को दोषियों द्वारा दायर दया याचिकाओं के शीघ्र निपटारे के लिए कई निर्देश जारी किए। इस दौरान SC ने यह भी निर्देश दिया कि ऐसी याचिकाओं से निपटने के लिए राज्य सरकारों/केंद्र शासित प्रदेशों के गृह विभाग या जेल विभाग द्वारा एक समर्पित प्रकोष्ठ का गठन किया जाएगा।

न्यायमूर्ति अभय एस ओका, न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने कहा कि समर्पित प्रकोष्ठ संबंधित सरकारों द्वारा निर्धारित समय सीमा के अंदर दया याचिकाओं पर शीघ्र कार्रवाई करने के लिए जिम्मेदार होगा।

पीठ ने कहा, समर्पित प्रकोष्ठ के प्रभारी अधिकारी को पदनाम द्वारा नामित किया जाएगा, जो समर्पित प्रकोष्ठ की ओर से संचार प्राप्त करेगा और जारी करेगा। राज्य सरकारों/केंद्र शासित प्रदेशों के कानून और न्यायपालिका या न्याय विभाग के एक अधिकारी को इस प्रकार गठित समर्पित प्रकोष्ठ से संबद्ध किया जाना चाहिए।

यह निर्देश ऐसे समय में आया है जब अदालत ने बंबई उच्च न्यायालय के उस आदेश को बरकरार रखा है, जिसमें 2007 के पुणे बीपीओ कर्मचारी सामूहिक दुष्कर्म और हत्या मामले में दो दोषियों की मौत की सजा को क्रियान्वयन में अत्यधिक देरी के आधार पर 35 वर्ष की अवधि के लिए आजीवन कारावास में बदल दिया गया था।

शीर्ष अदालत ने कहा कि सभी जेलों को समर्पित सेल के प्रभारी अधिकारी के पदनाम, उनके पते और ईमेल आईडी के बारे में सूचित किया जाएगा।

जैसे ही जेल अधीक्षक/प्रभारी अधिकारी को दया याचिका प्राप्त होती है, वह तुरंत उसकी प्रतियां समर्पित सेल को भेज देगा और संबंधित पुलिस थाने के प्रभारी अधिकारी और/या संबंधित जांच एजेंसी से विवरण/सूचना (जैसे आपराधिक पृष्ठभूमि, आर्थिक स्थिति आदि) मांगेगा।

पीठ ने कहा, जेल प्राधिकारियों द्वारा अनुरोध प्राप्त होने पर, संबंधित पुलिस थाने के प्रभारी अधिकारी का दायित्व होगा कि वे तत्काल जेल प्राधिकारियों को उक्त जानकारी उपलब्ध कराएं।

इसमें कहा गया है कि जैसे ही समर्पित प्रकोष्ठ को दया याचिकाएं प्राप्त होंगी, याचिकाओं की प्रतियां राज्य के राज्यपाल या भारत के राष्ट्रपति के सचिवालयों को भेज दी जाएंगी, जैसा भी मामला हो, ताकि सचिवालय अपने स्तर पर कार्रवाई शुरू कर सके।

पीठ ने कहा, जहां तक ​​संभव हो, सभी पत्राचार ईमेल के माध्यम से किए जाएं, जब तक कि गोपनीयता शामिल न हो और राज्य सरकार इस फैसले के संदर्भ में दया याचिकाओं से निपटने के लिए दिशा-निर्देशों वाले कार्यालय आदेश/कार्यकारी आदेश जारी करेगी।

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