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दुश्मन को चारों खाने चित करने के लिए भारत ने K-4 परमाणु बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण

Ranjeet Gupta 7 years ago (Last updated: 7 years ago) 1 minute read 0 comments

इसका विकास रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने किया है। इसे अरिहंत श्रेणी की परमाणु क्षमता से संपन्न पनडुब्बियों में तैनात किया जाना है। परमाणु क्षमता से संपन्न पनडुब्बियों पर तैनाती से पहले भारत इस मिसाइल के अभी और परीक्षण करेगा।  आंध्र प्रदेश के समुद्री तट से दागी गई इस मिसाइल की रेंज 3,500 किलोमीटर है और यह पनडुब्बी से दुश्मन के ठिकानों को निशाना बनाने में सक्षम है।सरकारी सूत्रों ने बताया कि मिसाइल का परीक्षण दिन के समय समुद्र में पानी के भीतर बने प्लेटफॉर्म से किया गया। इसका विकास रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने किया  दुश्मन को चारों खाने चित करने के लिए भारत ने अपनी सामरिक क्षमता को बढ़ाते हुए रविवार को शक्तिशाली के-4 बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया है। पिछले 17 नवंबर को 2000 कि‍मी की मारक क्षमता वाली बैलेस्टिक मिसाइल अग्नि-2 का रात्रिकालीन परीक्षण सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया। देश में ही बनाई गई 21 मीटर लंबी, 1 मीटर चौड़ी, 17 टन वजन वाली यह मिसाइल 1000 किलोग्राम तक विस्फोटक ले जाने की क्षमता रखती है।

।पिछले 20 दिसंबर को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने पिनाका मिसाइल का फिर से ओडिशा तट से सफल परीक्षण किया था। भारतीय नौसेना के पास फिलहाल अरिहंत ही एक ऐसा परमाणु क्षमता वाला पोत है, जो परिचालन में है। के-4 उन दो अंडरवाटर मिसाइलों में से एक है, जिन्हें भारत नौसेना के लिए तैयार कर रहा है। दूसरी मिसाइल का नाम बीओ-5 है और उसकी रेंज 700 किलोमीटर है।

बैलेस्टिक मिसाइल की क्या आवश्यकता है

 बैलिस्टिक मिसाइल हमलों से बचाने के लिए भारत द्वारा एक बहुस्तरीय बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा प्रणाली तैनात करने की एक पहल है। इसका उपयोग किसी हथियार (प्राय: नाभिकीय अस्त्र) को किसी पूर्वनिर्धारित लक्ष्य पर दागने के लिये किया जाता है। यह मिसाइल अपने प्रक्षेपण के प्रारम्भिक चरण में ही केवल गाइड की जाती है; उसके बाद का पथ कक्षीय यांत्रिकी (या आर्बिटल मेकैनिक्स) के सिद्धान्तों एवं बैलिस्टिक्स के सिद्धान्तों से निर्धारित होता है। अभी तक इन्हें रासायनिक रॉकेट इंजनों के द्वारा प्रणोदित (प्रोपेल) किया जाता हैयह मिसाइल प्रक्षेपण के प्रारंभिक स्तर पर ही गाइड की जाती है। इसके बाद का पथ आर्बिटल मैकेनिक के सिद्धांतों पर एवं बैलेस्टिक सिद्धांतों से निर्धारित होता है। अभी तक इसे रासायनिक रॉकेट इंजन से छोड़ा जाता था।

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