पानी हमारे लिए एक ऐसी धरोहर है जिसे आने वाली पीढ़ी के लिए संभालकर रखना बहुत जरूरी है. पानी के बिना जीवन ही संभव नहीं. कहते हैं मनुष्य खाने के बिना तो रह सकता है लेकिन पानी के बिना जीवत नहीं रह सकता.

हालांकि लोगों को ये बात समझ में नहीं आती है और वह पानी को बचाकर रखने की जगह व्यर्थ करने पर तुले रहते हैं. लोग पानी के महत्व को समझना छोड़ चुके हैं. दुनिया को पानी की जरूरत को समझाने के उद्देश्य से ही विश्व जल दिवस को मनाने की प्रथा शुरू हुई है.
दार्शनिक थेल्स ने सैकड़ों वर्ष ईसा पूर्व कहा था कि जल ही समस्त भौतिक वस्तुओं का कारण और समस्त प्राणी जीवन का आधार है लेकिन अब लोग इस बात को महत्व नहीं दे रहे हैं.
अफसोस के साथ कहना होगा कि भारत समेत पूरी दुनिया तब से अब तक इस अमूल्य धरोहर को सहेजने में विफल रही है. इसी वजह से हर साल विश्व जल दिवस मनाया जाता है.
दुनिया को पानी की जरूरत से अवगत कराने के मकसद से संयुक्त राष्ट्र ने विश्व जल दिवस मनाने की शुरुआत की थी. साल 1992 में रियो डि जेनेरियो में आयोजित पर्यावरण तथा विकास के नजरिए से संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन में विश्व जल दिवस को मनाने की शुरुआत की गई थी, जिसका आयोजन पहली बार साल 1993 में 22 मार्च को हुआ था.
विश्व जल दिवस को मनाने का उद्देश्य दुनिया को यह बताना है कि पानी बचाना कितना जरूरी है, ये हमारा मूलभूत संसाधन है, इससे कई काम संचालित होते हैं और इसकी कमी से ज्यातार क्रिया कलाप ठप हो सकते हैं. लोगों को बताना कि पानी के बिना उनके अस्तित्व पर संकट गहरा सकता है- यही इसका मूल उद्देश्य है.
विश्व जल दिवस को हर साल एक थीम के साथ मनाया जाता है. इस साल की थीम- वेल्यूइंग वॉटर है, जिसका लक्ष्य लोगों को पानी का महत्व समझाना है. दुनिया में कई देश ऐसे हैं जहां लोगों को पीने तक का पानी नहीं मिल पाता और फिर लोग गंदा पानी पीकर कई सारी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करते हैं. ऐसे में पानी के मूल्य को समझना बहुत ही जरूरी है.
हर साल विश्व जल दिवस के मौके पर कई तरह के कार्यक्रमों का आयोजन होता है. भाषण, कविताओं और कहानियों के माध्यम से लोगों को जल संरक्षण और इसका महत्व समझाने की कोशिश की जाती है. कई तरह की तस्वीरें और पोस्टर शेयर किए जाते हैं जिनका उद्देश्य लोगों को पानी की जरूरत समझाना होता है.
