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कोरोना संकट: इंडियन ऑयल को पिछले चार साल में पहली बार हुआ भारी घाटा

Sarvoday Times 6 years ago 1 minute read 0 comments
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कोरोना संकट की वजह से पेट्रोलियम मार्केटिंग कंपनी इंडियन ऑयल (IOC) को पिछले चार साल में पहली बार किसी तिमाही में भारी घाटा हुआ है.

महंगा कच्चा तेल खरीदने और देश में लॉकडाउन की वजह से पेट्रोलियम की मांग में भारी गिरावट आने से कंपनी को मार्च तिमाही में 5,185 करोड़ रुपये के भारी घाटे का सामना करना पड़ा.

घाटे की एक बड़ी वजह यह है कि कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट की वजह से कंपनी को इन्वेंट्री (जमा कच्चा माल) में भारी नुकसान उठाना पड़ा.

कंपनी ने कच्चा तेल लेकर करीब 45 दिन का भंडारण कर लिया था. इसके बाद कच्चे तेल की कीमतें काफी गिर गई. यानी जब कंपनी ने इस कच्चे तेल को पेट्रोलियम उत्पादों की प्रोसेसिंग के लिए भेजा, तब तक कच्चा तेल काफी सस्ता हो गया था और कंपनी को इस पर नुकसान उठाना पड़ा.

इसके अलावा 25 मार्च को लॉकडाउन लगने से करीब एक हफ्ते तक मार्च तिमाही में तेल की मांग बिल्कुल जमीन पर आ गई थी. वित्त वर्ष 2019-20 की चौथी यानी मार्च तिमाही में कंपनी को कुल 5,185 करोड़ रुपये का भारी घाटा हुआ है. इसके पिछले साल की इसी तिमाही में कंपनी को 6,099 करोड़ रुपये का फायदा हुआ था.

गौरतलब है कि मार्च तिमाही में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत में करीब 65.6 फीसदी की गिरावट आ गई. कंपनी के फाइनेंस हेड संदीप कुमार गुप्ता ने बताया कि जनवरी से मार्च के दौरान इंडियन ऑयल को 14,692 करोड़ रुपये का इन्वेट्री लॉस हुआ, जबकि पिछले साल इस अवधि में इसमें कंपनी को 2,655 करोड़ रुपये का फायदा हुआ था.

असल में भारत में करीब 80 फीसदी कच्चा तेल आयात करना पड़ता है और इस तेल को आयात वाले देश से रिफाइनरी तक पहुंचने में 20 से 23 दिन लग जाते हैं.

इस दौरान कच्चे तेल की बाजार कीमत काफी बदल जाती है. मान लिया किसी कंपनी ने 40 डॉलर प्रति बैरल पर तेल मंगवाया और रिफाइनरी तक जब तक वह पहुंचा, तब तक कच्चा तेल घटकर 30 डॉलर प्रति बैरल हो गया. तो उसे 10 डॉलर प्रति बैरल का घाटा होगा, क्योंकि उसे तेल का मार्केट रेट तो मौजूदा बाजार कीमत के आधार पर ही तय करनी होगी.

मार्च तिमाही में IOC की तेल की ग्रॉस रिफाइनरी मार्जिन माइनस 9.64 डॉलर प्रति बैरल रही यानी उसे प्रति बैरल 9.64 डॉलर का नुकसान हुआ, जबकि एक साल पहले उसे प्रति बैरल 4.09 डॉलर का फायदा हुआ था.

लॉकडाउन खुलने के बाद भी तेल की मांग अभी पहले जैसे बढ़ने में काफी समय लगेगा. हालांकि इंडियन ऑयल के चेयरमैन संजीव सिंह का कहना है कि ईंधन की मांग में काफी तेजी से सुधार हो रहा है और इस साल के अंत तक मांग बिल्कुल सामान्य हो जाएगी.

कंपनी की रिफाइनरी क्षमता का फिलहाल 90 फीसदी इस्तेमाल हो रहा है और जुलाई अंत तक इसे 100 फीसदी करने की कंपनी उम्मीद कर रही है. गौरतलब है कि देश की कुल 50 लाख बैरल प्रति दिन की रिफाइनरी क्षमता में एक-तिहाई योगदान इंडियन ऑयल का ही है.

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