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नया कानून लागू होने पर खत्म हो जाएगी भारत के 40 करोड़ सोशल मीडिया यूजर्स

Ranjeet Gupta 7 years ago (Last updated: 7 years ago) 1 minute read 0 comments
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केंद्र सरकार सोशल मीडिया और मैसेजिंग एप्स के लिए नया कानून बना रही है। इस महीने के अंत तक यह कानून आने की संभावना है। इसमें ऐसे प्रावधान किए गए हैं जिससे फेसबुक, ट्विटर, यूट्यूब और टिकटॉक को सरकारी एजेंसियों द्वारा मांगे जाने पर यूजर की पहचान का खुलासा करना होगा। स्पष्ट है कि नया कानून आने पर देश के करीब 40 करोड़ सोशल मीडिया यूजर्स की गोपनीयता खत्म हो जाएगी।

अनिवार्य होगा सरकार का निर्देश मानना

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फेक न्यूज, चाइल्ड पोर्न, रंगभेद और आतंकवाद संबंधित कंटेंट के प्रसार को देखते हुए पूरी दुनिया में उनकी जिम्मेदारी तय करने की कोशिशें हो रही हैं। इसके लिए सोशल मीडिया से संबंधित नियम-कायदे बनाए जा रहे हैं, लेकिन भारत में बन रहा कानून इन सबसे विस्तृत है। इसके तहत सोशल मीडिया कंपनियों को सरकार का निर्देश मानना ही होगा और इसके लिए वारंट या अदालत के आदेश की अनिवार्यता भी नहीं होगी।

सितंबर, 2018 में जारी किया था मसौदा

भारत सरकार ने सोशल मीडिया से संबंधित दिशानिर्देश दिसंबर, 2018 में जारी किए थे और इस पर आम लोगों से सुझाव मांगे गए थे। इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने नए प्रावधानों का विरोध करते हुए इन्हें निजता के अधिकार के खिलाफ बताया था, लेकिन जानकारी के मुताबिक सरकार इसमें कोई बड़ा बदलाव नहीं करने जा रही। प्रस्तावित कानून में सोशल मीडिया कंपनियों को सरकार के आदेश पर 72 घंटे के अंदर पोस्ट का मूल पता करने का प्रावधान किया गया था। 

उनके लिए कम से कम 180 दिन तक रिकॉर्ड सुरक्षित रखना भी अनिवार्य किया गया था। ये नियम उन सभी सोशल मीडिया कंपनियों के लिए हैं जिनके 50 लाख से ज्यादा यूजर हैं। भारत में करीब 50 करोड़ लोग इंटरनेट का उपयोग करते हैं, लेकिन अभी यह स्पष्ट नहीं है कि विदेशी यूजर्स इस कानून के दायरे में आएंगे या नहीं।

नए प्रावधानों से नाखुश सोशल मीडिया कंपनियां

व्हाट्सएप ने बुधवार को कहा कि वह सुरक्षा के मामले में कोई समझौता नहीं करेगी क्योंकि इससे यूजर्स असुरक्षित महसूस करेंगे। वहीं, टेक कंपनियों और नागरिक अधिकार समूह नए कानून को सेंसरशिप और नई कंपनियों के लिए बोझ बता रहे हैं। उन्होंने इस मामले में केंद्रीय सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद को खुला खत भी भेजा है। 

मंत्रालय के एक अधिकारी ने हालांकि स्पष्ट किया है कि मोजिला और विकीपीडिया नए कानून के दायरे में नहीं आएंगी। ब्राउजर, ऑपरेटिंग सिस्टम, सॉफ्टवेयर विकसित करने वाले प्लेटफॉर्म आदि को इससे बाहर रखा गया है, लेकिन सभी सोशल मीडिया कंपनियों और मैसेजिंग एप के लिए इन्हें मानना अनिवार्य होगा।  

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