April 21, 2021

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सस्ता हुआ होम लोन, ब्याज दर को रेपो रेट से जोड़ने से

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आरबीआई द्वारा एक अक्तूबर से ब्याज दरों की नई व्यवस्था को शुरू करने के बाद नए ग्राहकों के लोन पर इसका असर दिखना शुरू हो गया है। वहीं पुराने ग्राहकों को इसका लाभ कम से कम तीन महीने बाद से मिलने लगेगा। ऐसा इसलिए क्योंकि पुराने चल रहे लोन का रीसेट पीरियड खत्म होने के बाद ही इसको रेपो रेट में बदलवाया जा सकता है।

कब कम होगी ईएमआई

बैंक आरबीआई की मौद्रिक नीति आने के बाद वाले महीने से ब्याज दरों में बदलाव करेंगे। अगर रेपो रेट में आरबीआई कमी करता है तो फिर इसका फायदा अगले महीने से मिलेगा। हालांकि यह केवल उनके लिए होगा, जो नया लोन लेते हैं। पुराने ग्राहकों को कम से कम तीन महीने का इंतजार करना पड़ेगा। आरबीआई ने पुराने ग्राहकों के लिए कम से कम तीन महीने का रिसेट पीरियड करने का निर्देश दिया है।

इस उदाहरण से समझे 

ऐसे में अगर किसी ग्राहक का लोन सितंबर में शुरू हुआ है और आरबीआई अक्तूबर में मौद्रिक नीति की समीक्षा करते हुए रेपो रेट में कमी करता है तो उस ग्राहक के लिए ब्याज दरों में कमी दिसंबर से होगी। जब भी रेपो रेट में कमी या फिर बढ़ोतरी होगी तो उसका फायदा हर तीन महीने के बाद ही मिलेगा।

भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंकों से कहा था कि वो ब्याज दर को रेपो रेट से जोड़ें, ताकि लोगों के लोन की ईएमआई कम हो सके। अभी तक बैंक सभी तरह के होम लोन, कार लोन, शैक्षिक लोन और पर्सनल लोन मार्जिनल कॉस्ट ऑफ लैंडिंग रेट (एमसीएलआर) के द्वारा तय करते थे। एमसीएलआर से लोन की ब्याज दर काफी महंगी हो जाती थी। हालांकि अब रेपो रेट लिंक रेट (आरआरएलआर) की व्यवस्था शुरू होने से लोन लेने वाले ग्राहकों की ईएमआई कम होने लगी है।

एक फीसदी सस्ता हुआ होम लोन

रेपो रेट से ब्याज दर को लिंक करने के बाद से सभी तरह के लोन की ब्याज दर में एक फीसदी की कमी आ गई है। ब्याज दर रेपो रेट आधारित होने से हाउसिंग लोन की ब्याज दर आठ फीसदी के आसपास आ गई है। वहीं, कार लोन के लिए भी नौ फीसदी के आसपास ही ब्याज देना पड़ेगा। एमसीएलआर आधारित ब्याज दर से रेपो रेट आधारित ब्याज दर में स्विच करने वाले ग्राहकों को भी ब्याज दरों में राहत मिलेगी।

हर तीन महीने में होगा बदलाव

आरबीआई ने बैंकों से कहा कि वो रेपो रेट आधारित ब्याज दर में तीन महीनों में कम से कम एक बार बदलाव जरूर करें। इसका फायदा नए ग्राहकों के अलावा पुराने ग्राहकों को भी मिलेगा। केंद्रीय बैंक ने बैंकों से कहा था कि वो एमसीएलआर के बजाए एक्सटर्नल बेंचमार्क रेट का प्रयोग करें।

रिजर्व बैंक कर चुका है इतनी कटौती

रिजर्व बैंक वर्ष 2019 के दौरान रेपो रेट में 1.10 फीसदी की कटौती कर चुका है। अभी रेपो रेट 5.40 फीसदी है। इसके मद्देनजर लोन की ब्याज दर को रेपो रेट से लिंक करने से पुराने हाउसिंग लोन की ब्याज दर में एक फीसदी तक की कमी संभव होगी।

तीन तरह के बेंचमार्क रेट

बैंकों में फिलहाल तीन तरह के एक्सटर्नल बेंचमार्क रेट चल रहे हैं, जिनके हिसाब से ब्याज दरों को तय किया जाता है। बेंचमार्क आधारित ब्याज दर को तय करने का तरीका ज्यादा पारदर्शी नहीं होता है। बैंक लोन की ब्याज दर को बेंचमार्क रेट के हिसाब से तय करते थे। लेकिन बैंकों की बेंचमार्क रेट अलग-अलग होने से कर्ज की ब्याज दर में काफी अंतर हो जाता था। हर बैंक की अपनी बेंचमार्क रेट होती थी।

एमसीएलआर ज्यादा पारदर्शी व्यवस्था

बैंकों में लोन की ब्याज दर को तय करने के लिए लागू की एमसीएलआर ज्यादा पारदर्शी व्यवस्था है। लेकिन इसमें कमी है कि बैंक इसको तय करते वक्त आरबीआई द्वारा रेपो रेट में किए गए बदलाव को पूरी तरह से समायोजित नहीं करते हैं। एमसीएलआर आधारित ब्याज दर एक से तीन साल के लिए तय होती है। तय अवधि के बाद ब्याज दर को संशोधित कराया जा सकता है।

आरआरएलआर से पड़ेगा ज्यादा असर

एक अक्तूबर से देश भर में सभी बैंकों में ब्याज दरों को रेपो रेट से लिंक कर दिया गया है। इससे ब्याज दरों में कमी आई है। ऐसा इसलिए क्योंकि आरबीआई फिलहाल रेपो रेट में कमी करता जा रहा है। अगर भविष्य में आरबीआई रेपो रेट में किसी तरह की कोई बढ़ोतरी करता है, तो फिर इसका असर आपके लोन की ईएमआई पर भी पड़ेगा। रेपो रेट में कमी पर ब्याज दर उसी अनुपात में कम या बढ़ने पर उसी अनुपात में बढ़ेगी। रिजर्व बैंक हर दो माह में रेपो रेट की समीक्षा और महंगाई दर के हिसाब से इसमें कमी व बढ़ोतरी करता है।
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