गोण्डा।बाल तस्करी के खिलाफ अपने सतत प्रयासों के तहत, अपराजिता सामाजिक समिति—जो कि जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन एलायंस की साझेदार संस्था है—ने विश्व मानव तस्करी निरोधक दिवस के अवसर पर गोंडा में एक बहु-हितधारक समन्वय कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में रेलवे, रेलवे सुरक्षा बल,राजकीय रेलवे पुलिस, चाइल्ड वेलफेयर कमेटी, चाइल्डलाइन, श्रम विभाग, एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट, जिला प्रोबेशन अधिकारी ), वन स्टॉप सेंटर और मीडिया प्रतिनिधियों ने सक्रिय भागीदारी की।
कार्यक्रम का उद्देश्य विभिन्न विभागों के बीच सहयोग को मजबूत करना, ज़मीनी स्तर की चुनौतियों की पहचान करना, तथा बाल तस्करी की रोकथाम, बचाव, पुनर्वास और कानूनी प्रक्रिया को प्रभावी बनाने हेतु संयुक्त कार्ययोजना तैयार करना था। सभी प्रतिभागियों ने यह साझा किया कि बाल तस्करी से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए बहु-एजेंसी समन्वय और समयबद्ध कार्रवाई अत्यंत आवश्यक है। अपराजिता की निदेशक किरण बैस ने कहा, “बाल तस्करी रोकने के लिए अभियोजन सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। जब तक दोषियों को सज़ा नहीं मिलेगी, तब तक डर और रोकथाम संभव नहीं है। बच्चों के बचाव कार्यों को जिला प्रशासन के साथ मजबूत तालमेल और त्वरित कानूनी कार्रवाई के साथ जोड़ना होगा—तभी हम बच्चों की रक्षा कर पाएंगे और तस्करी के नेटवर्क को तोड़ सकेंगे।
कार्यक्रम मे स्टेशन अधीक्षक रेलवे
राय सिंह मीना ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की तथा रेलवे प्रशासन की कार्यप्रणाली को विस्तृत तरीके से पेश किया। अपराजिता के कार्यक्रम प्रबंधक अभय द्वारा पीपीटी के माध्यम से मानव तश्करी, नेटवर्किंग, हितधारको के दायित्व आदि विषय पर जानकारी दी। श्रम विभाग से एलईओ सत्येंद्र प्रताप द्वारा बाल तश्करी के मजदूरी से संबंध तथा इसकी प्रक्रिया को विस्तार से बताया। सीडब्ल्यूसी से मनोज कुमार उपाध्याय द्वारा सीडब्ल्यूसी की भूमिका पर प्रकाश डाला। डिसी आत्रेय त्रिपाठी द्वारा अपराजिता द्वारा जेआरसी के साथ मिलकर जनपद मे किये जा रहे कार्य के विषय मे बताया गया। इस दौरान मानव तश्करी को रोकने एक बेहतर रणनीति बनाने तथा के विषय पर सीपीओ चंद्रमोहन वर्मा ने विचार रक्खे। आरपीएफ इंस्पेक्टर ने भूमिका और प्रणाली पर बल पूर्वक अपनी बात रखी। वन स्टॉप सेंटर, चाईल्ड हेल्प लाईन, रेलवे, आरपीएफ, जीआरपी, सीडब्लूसी,सीपीओ, अपराजिता, मीडिया बंधु आदि लोग उपस्थित रहे।
