ग्रेटर नोएडा, 25 अगस्त 2025
ग्रेटर नोएडा में घटित निक्की भाटी हत्याकांड ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। 28 वर्षीय निक्की, जिसे विवाह के समय दहेज़ स्वरूप गाड़ी, सोना और नकद दिया गया था, फिर भी उसके ससुराल पक्ष की और अधिक पैसों की भूख शांत नहीं हुई। आरोप है कि पति विपिन भाटी और ससुराल वालों ने 36 लाख रुपये की अतिरिक्त मांग की, और जब यह मांग पूरी न हुई, तो निक्की को बेरहमी से ज़िंदा जला दिया गया।
निक्की की मौत ने न सिर्फ़ एक परिवार को उजाड़ दिया है, बल्कि पूरे समाज में दहेज़ प्रथा की भयावह सच्चाई को फिर से सामने ला खड़ा किया है।
पिता का दर्द और गुस्सा
निक्की के पिता, भीखारी सिंह पैयेला, ने मीडिया से बात करते हुए कहा –
“मेरी बेटी की हत्या कर दी गई है। मैंने शादी में सब कुछ दिया, फिर भी मेरी बच्ची को ज़िंदा जला दिया गया। क्या आपको पता है कि दहेज़ लेना अपराध है? ये लोग जानवर हैं, इंसान कहलाने लायक नहीं।”
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से गुहार लगाई है कि आरोपियों को तुरंत कठोरतम सज़ा दी जाए। उनका कहना है –
“सिर्फ़ जेल नहीं, इनका घर भी गिराया जाए ताकि कोई और पिता इस तरह अपनी बेटी को न खोए।”
घटना का क्रम
- निक्की की शादी तीन साल पहले विपिन भाटी से हुई थी।
- विवाह के समय Scorpio SUV, सोना और नकद उपहार स्वरूप दिया गया।
- इसके बावजूद ससुराल वालों ने 36 लाख रुपये की मांग रखी।
- निक्की पर लगातार मानसिक और शारीरिक दबाव बनाया गया।
- घटना के दिन निक्की को घर में आग के हवाले कर दिया गया।
- गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उसकी मौत हो गई।
सबसे दिल दहला देने वाली बात यह रही कि यह दर्दनाक घटना निक्की के छह वर्षीय बेटे के सामने हुई, जो अपनी माँ को जलते हुए देखता रहा।
पुलिस कार्रवाई
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस हरकत में आई और पति विपिन भाटी, सास, ससुर और देवर को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने मामला दहेज़ हत्या (IPC 304B) और क्रूरता (498A) की धाराओं के तहत दर्ज किया है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों के खिलाफ सबूत मजबूत हैं और जल्द ही चार्जशीट दाखिल कर दी जाएगी।
समाज में गूंज
निक्की भाटी की हत्या ने न सिर्फ़ नोएडा, बल्कि पूरे देश में आक्रोश फैला दिया है। महिलाओं के संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि इस मामले को “फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट” में चलाकर जल्द से जल्द इंसाफ़ दिलाया जाए।
निष्कर्ष
दहेज़ विरोधी कानून भारत में दशकों से मौजूद हैं, लेकिन समाज में इसकी जड़ें अब भी गहरी हैं। निक्की भाटी की दर्दनाक मौत यह सवाल खड़ा करती है कि आखिर कब तक बेटियाँ इस लालच की बलि चढ़ती रहेंगी?
निक्की का यह मामला केवल एक परिवार का दर्द नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए एक चेतावनी है — “दहेज़ हत्या बंद होनी चाहिए, और इसके दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाना चाहिए।”
