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वंदे भारत एक्सप्रेस कोच उत्पादन बढ़ाने के

Ranjeet Gupta 8 years ago 1 minute read 0 comments

उत्तर प्रदेश में रायबरेली स्थिति रेलवे की मॉर्डन कोच फैक्ट्री (एमसीएफ) आधुनिक ट्रेनों के कोच उत्पादन का नया हब बनने जा रही है। देश की पहली सेमी हाई स्पीड ट्रेन वंदे भारत एक्सप्रेस की लोकप्रियता को देखते हुए सरकार और नई ट्रेनें पटरी पर उतारने के लिए उत्सुक है। एमसीएफ के कायाकल्प का काम लगभग पूरा हो चुका है। और 1100 से अधिक पदों पर नई भर्तियों का काम शुरू होने जा रहा है।

रेल मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मॉर्डन कोच फैक्ट्री में वंदे भारत एक्सप्रेस (ट्रेन-18) के कोच बनाने का काम जल्द शुरू होने जा रहा है। पिछले साल 480 करोड़ की लागत से एमसीएफ के आधुनिकीकरण का काम लगभग पूरा हो चुका है। फैक्ट्री में रोबोटिक और ऑटोमेशन से कोच का निर्माण किया जाएगा। फैक्ट्री क्षमता विस्तार के साथ 1125 पदों पर भर्तिंयां की जाएंगी। रेलवे बोर्ड ने 550 पदों पर भर्ती की मंजूरी दे दी है। भर्ती प्रक्रिया जल्द ही शुरू की जाएगी।

अधिकारी ने बताया कि वंदे भारत एक्सप्रेस की लोकप्रियता को देखते हुए नई टे्रनें जल्द से जल्द पटरी पर लाने का दबाव है। इसलिए इंटीग्रेटेड कोच फैक्ट्री (आईसीएफ), चेन्नई के अलावा मार्डन कोच फैक्ट्री रायबरेली में वंदे भारत एक्सप्रेस के कोच उत्पादन करने का फैसला किया गया है। इस साल मार्च के अंत तक तीन वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों को पटरी पर दौड़ाने का लक्ष्य रखा गया है। कुल 30 वंदे भारत ट्रेनें बनाने के लिए रेलवे ने टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसमें 2019-20 में 10 वंदे भारत ट्रेनें देश के विभिन्न प्रमुख रेलवे मार्गो पर चलने लगेंगी।

उन्होंने बताया कि सेमी हाई स्पीड वंदे भारत एक्सप्रेस के अलावा भविष्य में एमसीएफ में हमसफर (एसी-3) और बुलेट ट्रेन के कोच बनाने की योजना है। इसके अलावा पहली बार एल्मुमिनियम कोच, मेट्रो कोच, एलएचबी कोच व मॉर्डन कोच उक्त फैक्ट्री में बनाने का फैसला पहले किया जा चुका है। एमसीएफ विभिन्न आधुनिक ट्रेनों के लिए हर साल 3000 कोच का उत्पादन करेगा।

रेलवे बोर्ड के सदस्य मेंबर रोलिंग स्टॉक राजेश अग्रवाल ने ‘हिन्दुस्तान’ को बताया कि एमसीएफ, रायबरेली विश्व स्तर की फैक्ट्री में शुमार हो गई है। यहां मॉर्डन कोच आयातित कोच की अपेक्षा सस्ते होंगे। इसके अलावा इनमें वाईफाई, सीसीटीवी सर्विलॉस जैसी आधुनिक सुविधा से लैस होगी। कोच में डोर कंट्रोल सिस्टम, ट्रेन मैनेजमेंट सिस्टम, मोबाइल चार्जिंग आदि की सुविधा होगी। फैक्ट्री में मेट्रो टेस्टिंग ट्रैक (एक किलोमीटर), बुलेट टेस्टिंग ट्रैक (पांच किलोमीटर), रोबोटिंग मैन्युफैक्चरिंग, टेस्टिंग शेड आदि होंगे।

फैक्ट्री में राज्यों में प्रस्तावित मेट्रो रेल परियोजना को जरूरत के मुताबिक एल्युमुनियम कोच, स्टीनलेस स्टील कोच आदि कोच बनेंगे। इसके अलावा मीटर गेज, ब्रॉड गेज, स्टैंडर्ड गेज आदि के कोच होंगे। वर्तमान में फैक्ट्री में 2400 कर्मचारी हैं। इन कोचों की रफ्तार से 100 से 300 किलोमीटर प्रतिघंटा होगी।

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