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प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधिः अन्नदाता की उन्नति, राष्ट्र की समृद्धि

Sarvoday Times 4 months ago (Last updated: 4 months ago) 1 minute read 0 comments
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देश के मा0 प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा किसानों के हित में संचालित प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना आज के दौर में भारतीय कृषि नीति का सबसे महत्वपूर्ण और परिवर्तनकारी योजना साबित हुई है। भारत सरकार द्वारा शत-प्रतिशत वित्त पोषित यह योजना विशेष रूप से उन छोटे और सीमांत किसानों को ध्यान में रखकर संचालित की गई है, जो अक्सर निवेश की कमी के कारण खेती में पिछड़ जाते थे। इस योजना की संरचना बेहद सरल और प्रभावी है, जिसके तहत प्रत्येक पात्र कृषक परिवार को प्रतिवर्ष 6,000 रुपये की प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता दी जाती है। यह राशि 2,000 रुपये की तीन समान किस्तों में सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाती है। योजना की सबसे बड़ी विशेषता इसका ‘‘प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण‘‘ (डीबीटी) तंत्र है, जिसने बिचौलियों की भूमिका को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। उत्तर प्रदेश जैसे विशाल कृषि प्रधान राज्य में, जहाँ जोत का आकार छोटा है, यह योजना किसानों के लिए समय पर खाद, बीज और अन्य कृषि आवश्यकताओं को पूरा करने का एक विश्वसनीय जरिया बन गई है।
इस योजना के तकनीकी और प्रशासनिक ढांचे में -कृषक परिवार की परिभाषा को बहुत स्पष्ट रखा गया है। उत्तर प्रदेश ने इस योजना के क्रियान्वयन में राष्ट्रीय स्तर पर कीर्तिमान स्थापित किए हैं। इस योजना के प्रारंभ से लेकर 22वीं किस्त के वितरण तक, उत्तर प्रदेश में अब तक कुल 3.12 करोड़ कृषक परिवारों को इस योजना से जोड़ा जा चुका है। इन परिवारों के बैंक खातों में अब तक कुल 99,032.58 करोड़ रुपये की बड़ी धनराशि हस्तांतरित की जा चुकी है। केवल 22वीं किस्त में ही प्रदेश के 2.18 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को 4,364.00 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की गई। यह निवेश न केवल ग्रामीण क्रय शक्ति को बढ़ाता है, बल्कि खेती-किसानी के प्रति किसानों के मनोबल को भी ऊँचा करता है, जिससे वे भविष्य की फसलों के लिए बेहतर योजना बनाकर खेती करते हैं।
वित्तीय वर्ष 2025-26 के नवीनतम आंकड़े उत्तर प्रदेश में इस योजना की व्यापकता और सफलता की एक नई कहानी बयां करती हैं। इस वित्तीय वर्ष के दौरान, प्रदेश के 2.34 करोड़ से अधिक पात्र किसानों के खातों में 13,721 करोड़ रुपये से अधिक की राशि भेजी गई है। यह आंकड़ा केवल एक संख्या नहीं है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में आए उस बदलाव का प्रतीक है जो खेती को घाटे से उबारकर लाभ की ओर ले जा रहा है। लाभार्थियों के विश्लेषण से पता चलता है कि इसमें 1.91 करोड़ से अधिक पुरुष और 88 लाख से अधिक महिला कृषक परिवार शामिल हैं। महिलाओं की इतनी बड़ी भागीदारी इस योजना में महिला सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में देखें तो देश के कुल 9.7 करोड़ लाभार्थियों में से लगभग 24 प्रतिशत (2.34 करोड़ से अधिक) लाभार्थी अकेले उत्तर प्रदेश के हैं, जो डबल इंजन सरकार द्वारा योजनाओं के बेहतर कार्यान्वयन को प्रमाणित करता है।
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की विकास यात्रा का वर्षवार आंकड़ा निरंतर प्रगति की ओर अग्रसर रहा है। वर्ष 2018-2019 में 2,238.92 करोड़ रुपये के वितरण से शुरू हुआ यह सफर 2019-2020 में 11,006.87 करोड़ रुपये तक पहुँच गया। इसके बाद, वर्ष 2020-2021 में 14,432.14 करोड़, 2021-2022 में 15,775.52 करोड़ और 2022-2023 में 12,454.32 करोड़ रुपये की राशि किसानों तक पहुँची। आगामी वर्षों में भी यह गति बनी रही, जहाँ 2023-2024 में 13,808.48 करोड़ और 2024-2025 में 15,594.74 करोड़ रुपये का वितरण किया गया। वर्तमान वर्ष 2025-2026 में अब तक 13,721.59 करोड़ रुपये वितरित किए जा चुके हैं। इन आठ वर्षों के दौरान कुल वितरित राशि 99,032.58 करोड़ रुपये के विशाल आंकड़े तक पहुंच चुकी है। यह निरंतरता दर्शाती है कि सरकार किसानों की आय में वृद्धि और उन्हें कर्ज के जाल से मुक्त करने के लिए कितनी गंभीर है, जिससे ग्रामीण ऋणग्रस्तता में भारी कमी आई है।
पीएम-किसान योजना ने कृषि निवेश के प्रति किसानों के नजरिए को भी बदला है। बुआई के मौसम से ठीक पहले मिलने वाली यह राशि किसानों को साहूकारों की ऊँची ब्याज दरों वाले ऋण से बचाती है। उत्तर प्रदेश के कई जिलों में यह देखा गया है कि छोटे किसान इस राशि का उपयोग केवल बीज और खाद के लिए ही नहीं, बल्कि आधुनिक कृषि यंत्रों के किराए और सूक्ष्म सिंचाई जैसे सुधारों के लिए भी कर रहे हैं। इससे फसल की पैदावार में सुधार हुआ है और किसानों की जोखिम सहने की क्षमता बढ़ी है। राज्य सरकार द्वारा भू-लेखों के सत्यापन और ई-केवाईसी की प्रक्रिया को अनिवार्य बनाने से योजना की पारदर्शिता और भी सुदृढ़ हुई है, जिससे यह सुनिश्चित हुआ है कि सरकारी खजाने का पैसा केवल वास्तविक खेती करने वाले हाथों में ही जाए। यह डिजिटल इंडिया और कृषि के सफल संगम का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसने व्यवस्था में विश्वास पैदा किया है।
सामाजिक सुरक्षा के दृष्टिकोण से यह योजना ग्रामीण पलायन को रोकने में भी एक मूक क्रांति की तरह काम कर रही है। जब छोटे किसान को यह भरोसा मिलता है कि उसे साल में तीन बार एक निश्चित राशि प्राप्त होगी, तो वह अपनी जमीन छोड़ने के बजाय उसे और अधिक उपजाऊ बनाने पर ध्यान केंद्रित करते है। उत्तर प्रदेश में कृषि क्षेत्र में आई यह स्थिरता ग्रामीण बाजारों में रौनक ला रही है। 2.34 करोड़ परिवारों का सीधे तौर पर इस योजना से लाभान्वित होना यह स्पष्ट करता है कि सरकार की पहुँच अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक हो चुकी है। महिला लाभार्थियों की 88 लाख से अधिक की संख्या यह भी बताती है कि अब ग्रामीण भारत में महिलाएं केवल कृषि श्रमिक नहीं, बल्कि आधिकारिक तौर पर किसान के रूप में पहचानी जा रही हैं, जो सामाजिक ढांचे में एक बड़ा और सकारात्मक बदलाव है।
प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना ने उत्तर प्रदेश के कृषि परिदृश्य को एक नई दिशा दी है। लगभग एक लाख करोड़ रुपये का निवेश सीधे किसानों के खातों में पहुँचना ऐतिहासिक है। यह योजना न केवल किसानों को आर्थिक संबल प्रदान कर रही है, बल्कि उन्हें एक गरिमामय जीवन जीने का अवसर भी दे रही है। आंकड़ों की पारदर्शिता और लाभार्थियों की विशाल संख्या इस बात का प्रमाण है कि विकास का लाभ अब सीधे जनता तक पहुँच रहा है। आने वाले समय में, यह योजना और इसके साथ जुड़ी अन्य कृषि कल्याणकारी नीतियां मिलकर उत्तर प्रदेश को ’’उत्तम प्रदेश’’ से ’’आत्मनिर्भर प्रदेश’’ बनाने के संकल्प को सिद्ध करेंगी। इस योजना की सफलता ने प्रदेश के अन्नदाता को यह विश्वास दिलाया है कि राष्ट्र उनकी मेहनत का सम्मान करता है और हर कदम पर उनके साथ खड़ा है।

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