48 किलोग्राम भारवर्ग में छह बार विश्व चैम्पियन रह चुकीं मैरी का यह 51 किलोग्राम भार वर्ग में वर्ल्ड चैंपियनशिप में पहला पदक होगा। वह हालांकि, इस भारवर्ग में 2014 एशियाई खेलों में स्वर्ण और 2018 एशियाई खेलों में कांस्य पदक भी जीत चुकी हैं। साथ ही इसी भार वर्ग में मैरी ने लंदन ओलंपिक 2012 में कांस्य जीता था।
आज के इस मैच में मैरी कॉम ने शुरुआत अच्छी की और दूरी बनाए रखते हुए दाएं जैब का इस्तेमाल किया। साथ ही वह दाएं हाथ से हुक भी लगा रही थीं। हल्के से बदले हुए स्टांस के साथ खेल रही मैरी बीच-बीच में चकमा दे बाएं जैब से सटीक पंच लगाने में भी सफल रहीं। उनकी विपक्षी मैरी की रणनीति समझ रही थीं और इसलिए एहतियात के साथ खेल रही थीं।
अंत में दोनों खिलाड़ी आक्रामक हो गईं। दूसरे दौर में दोनों मुक्केबाजों ने अच्छा किया, लेकिन मैरी अपनी विपक्षी से थोड़ा आगे रहीं। वह इंगोट के पास आते ही हुक का अच्छा इस्तेमाल कर रही थीं और यहीं वह इंगोट पर हावी रही थीं। तीसरे दौर में भी मैरी ने यही किया और जीत अपने नाम की।
इसके पहले छह बार की चैम्पियन एमसी मैरीकॉम ने बीते मंगलवार को थाईलैंड की जुटामास जिटपोंग को 5-0 से मात देते हुए क्वार्टरफाइनल में प्रवेश किया था। तीसरी वरीयता प्राप्त 36 वर्षीय मैरीकॉम को पहले दौर में बाई मिला था।
