गोण्डा। शोषित-पीड़ित सर्वहारा समाज के मसीहा, मंडल आयोग के सम्मानित अध्यक्ष,पूर्व सांसद व बिहार प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं सामाजिक न्याय के पुरोधा थे बीपी मंडल की 107वीं जन्मोत्सव मनाया गया। बीपी मंडल की सोच केवल सरकारी नौकरी में आरक्षण नहीं था बल्कि निजी क्षेत्र,भूमि,व्यापार,मीडिया,शिक्षा,रक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी जनसंख्या के अनुपात में भागीदारी प्राप्त कराना था जो आयोग ने केवल 27%तक ही सीमित कर दिया। सम्राट महापद्मनंद,सम्राट अशोक,महामना संतराम बीए,ज्योतिबाराव फूले,सावित्रीबाई फूले,फातिमा शेख,उस्मान शेख,शाहूजी महाराज,पेरियार रामास्वामी,पेरियार ललई सिंह यादव,बोधिसत्व बाबा साहेब भारत रत्न डाॅ.अम्बेडकर,जननायक भारत रत्न कर्पूरी ठाकुर के सपनो को साकार करके कमेरा समाज को सम्मान और अधिकार दिलाना चाहते थे। मंडल कमीशन की पूरी रिपोर्ट लागू न होने के फलस्वरूप कमेरा समाज को वास्तविक भागीदारी आज तक नहीं मिल पायी है जिससे आज सरकारी नीतियों और नीयत पर सवाल उठ रहे हैं। मंडल ऑदोलन भारत का “मूक ऑदोलन” कहा जाता है। यह केवल आरक्षण का संघर्ष नहीं था बल्कि आत्म-सम्मान,बराबरी और अस्तित्व की लड़ाई थी। मंडल आयोग की रिपोर्ट पूरी तरह लागू कराकर ही हम बीपी मंडल के सपने को साकार कर सकते हैं। यही उनके जन्मोत्सव का सबसे बड़ा संकल्प होगा। उक्त विचार रगड़गंज रोड पर एसएल शर्मा के निवास पर आयोजित बीपी मंडल के 107वें जन्मोत्सव कार्यक्रम में मास संगठन के राष्ट्रीय संगठक ए.के.नन्द ने व्यक्त किया। आरके यादव ने कहा कि बीपी मंडल के बताए रास्ते पर चलकर ही हम उनके सपनों को साकार कर सकते हैं। एसके मौर्य ने कहा कि बीपी मंडल एक सामाजिक ऑदोलन का नाम है और जब तक पूरी रिपोर्ट लागू नहीं होती हम चुप नहीं बैठेंगे। राजित राम चौहान ने कहा कि मंडल आयोग की रिपोर्ट हमारी आन-बान-शान का प्रतीक है। सीता राम यादव ने कहा कि मंडल आयोग की रिपोर्ट ने भारत में वर्गीय चेतना और संवेदना की आधारशिला स्थापित की है। राम प्रकाश कनौजिया ने कहा कि हमारा प्रयास ही हमारी सफलता का परिचायक है। राम गोपाल रावत ने कहा कि सबका सम्मान और सबका अधिकार ही मंडल साहेब की सोच थी। राधेश्याम वर्मा ने कहा कि सम्राट महापद्मनंद और देवानामपिय सम्राट अशोक के सपनों को साकार करना ही बीपी मंडल के जीवन का लक्ष्य था। सीमा वर्मा ने कहा कि सम्मान और अधिकार प्राप्त करना हमारा मौलिक अधिकार है।राधिका शर्मा ने कहा कि सम्मान और अधिकार के बिना मानव पशु के समान है। सुमन गौतम ने कहा कि ढोंग-पाखंड को जड़मूल से खत्म किये बिना हम सांस्कृतिक परिवर्तन नहीं कर सकते। कार्यक्रम में रक्षाराम,किशन कुमार नन्द,राजकुमार शर्मा,अमर सिंह गौतम,काशीराम वर्मा,गौरव सोनकर,अजय कुमार,नीलम,मीना गौतम,राम नरेश पाल,कमलेश कुमार,ज्ञान दास,बुद्ध राम बौद्ध,शिवकुमार कुरील सहित सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने सहभाग किया।
