October 18, 2021

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जासूसी मामले में व्हाट्सएप का केंद्र को जवाब- मई में ही दे दी थी जानकारी

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नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने इस बात पर आश्चर्य जताया कि व्हाट्सएप के शीर्ष अधिकारियों के साथ जून से लेकर सितंबर के बीच हुई कई दौर की बातचीत में कंपनी ने एक बार भी पेगासस हैकिंग मामले का उल्लेख नहीं किया। जबकि इस दौरान सरकार उसके समक्ष फेक न्यूज और अफवाहों के स्रोत का पता लगाने के लिए कह रही थी। इसलिए उसकी मंशा पर सरकार को संदेह है।
केंद्र सरकार के सूत्रों ने प्रश्न उठाया कि कहीं यह व्हाट्सएप संदेशों के स्रोत की जानकारी तथा जवाबदेही तय करने के लिए कोई कदम उठाने से सरकार को रोकने के लिए कंपनी की ओर से कोई अडंगा जैसी चाल तो नहीं है? सरकार हैकिंग मामले के खुलासे के समय को लेकर भी सवाल कर रही है। यह इस कारण महत्वपूर्ण हो जाता है कि केंद्र सरकार ने देश में सोशल मीडिया के दुरुपयोग को रोकने के उपाय के लिए उच्चतम न्यायालय से तीन महीने का समय मांगा है।

केंद्र सरकार के सूचना नहीं देने के दावे के बीच फेसबुक के स्वामित्व वाले व्हाट्सएप ने शुक्रवार को कहा कि मई में हमने एक सुरक्षा मुद्दे को हल किया और संबंधित भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय सरकारी अधिकारियों को सूचित किया था। इसके बाद से ही हमने लगातार निशाने पर आए यूजर्स की पहचान की और उनसे कहा कि वो अदालतों को कहें कि अंतरराष्ट्रीय सॉफ्टवेयर फर्म एनएसओ की जिम्मेदारी तय की जाए।
पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया में व्हाट्सएप के एक प्रवक्ता ने कहा कि वह भारत सरकार की मांग से सहमत है, जिसमें लाखों भारतीयों की निजता सुरक्षा को स्पष्ट करने को कहा गया है। उन्होंने कहा कि कंपनी सभी भारतीय नागरिकों की निजता की सुरक्षा की जरूरत के बारे में भारत सरकार के कड़े बयान से सहमत है। प्रवक्ता ने कहा कि हम सभी उपभोक्ताओं के मैसेजेज की सुरक्षा को लेकर प्रतिबद्ध है। हम भारत सरकार से सहमत हैं कि यह महत्वपूर्ण है कि हम सभी मिलकर सुरक्षा को कमजोर करने के प्रयास करने वाले हैकर्स से उपयोगकर्ताओं की रक्षा कर सकें। केंद्रीय सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने गुरुवार को कहा था कि सरकार व्हाट्सएप पर भारत के नागरिकों की निजता के उल्लंघन को लेकर चिंतित है।

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