
पिछले गुरुवार को सरकार की तरफ से जारी आंकड़ों में बताया गया कि अक्टूबर में देश के औद्योगिक उत्पादन में 3.34 प्रतिशत की गिरावट हुई है। जबकि इसी महीने खुदरा महंगाई की दर 5.54 प्रतिशत हो गई है।
महंगाई दर पिछले तीन महीनों के उच्च स्तर पर जाते ही बैंक ने रेपो रेट में कटौती का सिलसिला तोड़ दिया है। ऐसे में आम जनता के हाथ में खर्च करने योग्य अतिरिक्त राशि पहुंचाने की व्यवस्था सरकार की तरफ से ही करनी होगी। पर्सनल टैक्स में राहत इसका सबसे अच्छा तरीका हो सकता है।
वित्त मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक कुछ आर्थिक थिंक टैंक व संस्थानों की तरफ से भी आम बजट मेमोरेंडम प्राप्त हुआ है जिसमें घरेलू मांग को बढ़ाने को लेकर काफी विस्तार से चर्चा की गई है।
एक अन्य उद्योग चैंबर पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स ने भी पांच लाख रुपये तक की आय वाले करदाताओं को आयकर से पूरी तरह से छूट देने की बात कही है। उल्लेखनीय है कि वित्त मंत्री सीतारमण ने खुद भी आयकर में कटौती के ठोस संकेत दिए हैं।
आयकर की छूट सीमा को मौजूदा 2.50 लाख रुपये से बढ़ाकर पांच लाख रुपये करने का कदम बहुत उपयोगी साबित होगा। 10 से 20 लाख रुपये आय-वर्ग पर टैक्स की दर को 20 प्रतिशत और 20 लाख रुपये से ज्यादा पर 30 प्रतिशत निर्धारित करने का सुझाव दिया गया है।
